राजस्थान विधानसभा में पारित कृषि विधेयकों को राज्यपाल ने रोका

Smart News Team, Last updated: 02/12/2020 09:19 PM IST
  • केंद्रीय कृषि कानूनों को बायपास करने के लिए पिछले माह राजस्थान की विधानसभा में तीन कृषि संशोधन विधेयक लाए गए थे, लेकिन एक माह का समय गुजरने के बाद भी राज्यपाल कलराज मिश्र ने इन तीनों विधेयकों पर मुहर नहीं लगाई है. ऐसे में ये तीनों विधेयक राजभवन में ही अटके हुए हैं.
सांकेतिक फोटो

जयपुर. देश के कई राज्यों में केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. इन कानूनों को बायपास करने के लिए पिछले माह राजस्थान की विधानसभा में तीन कृषि संशोधन विधेयक लाए गए थे, लेकिन एक माह का समय गुजरने के बाद भी राज्यपाल कलराज मिश्र ने इन तीनों विधेयकों पर मुहर नहीं लगाई है. ऐसे में ये तीनों विधेयक राजभवन में ही अटके हुए हैं. राज्यपाल की मंजूरी नहीं होने के कारण ये विधेयक राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि अब लंबे समय के लिए ये तीनों विधेयक अटक गए हैं. 

बता दें कि केंद्रीय कानून के प्रावधानों में बदलाव वाले इन तीनों विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना राज्य में कानून के रूप में लागू नहीं किया जा सकता. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने इन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पहले दिन से ही मोर्चा खोल रखा है. राजस्थान में सरकार के साथ ही कांग्रेस पार्टी कई बार विरोध कर चुकी है. ऐसे में यदि इन विधेयकों को राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिलती है तो राजस्थान सरकार के साथ ही कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लग सकता है. 

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इसका एक कारण यह भी है कि इन विधेयकों के साथ पारित हुए महामारी विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन कृषि से जुड़े विधेयकों को राज्यपाल ने रोक लिया है. गौरतलब है कि 2 नवंबर को विधानसभा में केंद्रीय कृषि कानूनों के प्रावधान बदलने के लिए तीन कृषि विधेयक पारित किए थे. पहला विधयेक कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) राजस्थान संशोधन विधेयक 2020 है, इसमें किसान के उत्पीड़न पर सात साल तक की सजा और 5 लाख जुर्माने का प्रावधान है. 

दूसरा विधेयक कृषक ( सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार राजस्थान संशोधन विधेयक है. इस विधेयक में संविदा खेती को लेकर कड़े प्रावधान हैं. किसान से एमएसपी से कम पर संविदा खेती का करार मान्य नहीं होने और एमएसपी से कम पर करार करने को बाध्य करने पर 7 साल तक सजा और 5 लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है. तीसरा विधेयक आवश्यक वस्तु (विशेष उपबन्ध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 है, जिसमें राज्य सरकार कृषि जिंसों पर स्टॉक लिमिट लगा सकेगी.

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