जयपुर में अभिभावक उतरे सड़कों पर, कहा-बंद हो ऑनलाइन क्लास और स्कूलों की मनमानी

Smart News Team, Last updated: 16/08/2020 01:22 PM IST
  • जयपुर में आज शिक्षा संकुल पर ऑनलाइन क्लास के नाम पर निजी स्कूलों द्वारा पूरी फीस वसूलने के विरोध में रैली निकाली गई. ऑनलाइन कक्षा के नाम पर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. दिनभर मोबाइल या कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से कई तरह की बीमारियां हो सकती है.
अभिभावक एकता रैली 

जयपुर. लॉकडाउन के दौरान बच्चे स्कूल नही जा रहे है और ऐसे में ऑनलाइन क्लास चल रही है. ऐसे में लगातार फ़ीस को लेकर विवाद चल रहा है. इसी कड़ी में आज शिक्षा संकुल पर ऑनलाइन क्लास के नाम पर निजी स्कूलों द्वारा पूरी फीस वसूलने के विरोध में रैली निकाली गई. संयुक्त अभिभावक समिति के संयोजक सुशील शर्मा व प्रवक्ता मनीष विजयवर्गीय के नेतृत्व में यह रैली निकाली गई. जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावक शामिल हुए. अभिभावकों का कहना था कि जब बच्चे ऑनलाइन क्लास ले रहे है और स्कूल नहीं जा रहे है तो फिर स्कूल पूरी फ़ीस क्यों वसूलने में लगे है. अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में दखल दें, जिससे अभिभावकों को राहत मिले.

रैली में शामिल अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन कक्षा के नाम पर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. दिनभर मोबाइल या कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से कई तरह की बीमारियां हो सकती है. साथ ही जिन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, उनके लिए यह मेंटल स्ट्रेस का कारण भी यह बन रहा है. अभिभावकों ने नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं.

अभिभावकों की ये हैं मांग

अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि वह एक अध्यादेश द्वारा कोविड-19 की प्रभावी चिकित्सा या वैक्सीन उपलब्ध ना होने तक विद्यालयों को खोलने की अनुमति न दें. साथ ही विद्यालय को बंद रहने की अवधि की फीस वसूली की अनुमति भी ना दी जाए और स्कूल खुलने के बाद शेष अवधि के लिए मात्र ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी जाए. वहीं, ऑनलाइन कक्षाओं के व्यापक दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए इस पर रोक लगाने की मांग भी शिक्षकों ने की है. सरकार से मांग की है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ने की अनुमति भी स्कूलों को ना दी जाए. इसके साथ ही अभिभावकों ने यह भी मांग की है कि किसी भी छात्र या छात्रा का नाम फीस जमा ना होने के कारण या अन्य किसी कारण से विद्यालय से ना काटा जाए.

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