ज्वेलरी कारोबारी के घर आयकर टीम का छापा, सुरंग में छिपा मिला करोड़ों का माल

Smart News Team, Last updated: Fri, 22nd Jan 2021, 12:31 PM IST
  • पिछले दो दिन से सिल्वर आर्ट ग्रुप, चौरडिया ग्रुप और गोकुल कृपा पर चल रही आयकर विभाग की छापेमारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. ज्वेलरी व्यवसायी के घर पर आयकर विभाग को बकायदा एक सुरंगनुमा तहखाना मिला है, जिसमें 15 बोरे आर्ट ज्वेलरी व एंटीक सामान तथा लेनदेन व संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं.
सांकेतिक फोटो

जयपुर. जयपुर में तीन कारोबारियों के यहां दो दिन से चल रही आयकर छापे में चौंकाने वाली बात सामने आई है. एक ज्वेलरी कारोबारी के यहां तो आयकर अधिकारियों को सुरंगनुमा तहखाना मिला है, जिसमें कीमती सामान और दस्तावेज रखे थे. दरअसल, सिल्वर आर्ट ग्रुप, चौरडिया ग्रुप और गोकुल कृपा पर दो दिन से आयकर विभाग की छापेमारी चल रही है. अभी तक की कार्रवाई में इन तीनों कारोबारियों के यहां से कुल 1400 करोड़ रुपए की अघोषित आय का खुलासा हुआ है. 

सिल्वर आर्ट ग्रुप के ज्वेलरी व्यवसायी के घर पर आयकर विभाग को एक सुरंगनुमा तहखाना मिला है, जिसमें 15 बोरे आर्ट ज्वेलरी व एंटीक सामान तथा लेनदेन व संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं. इस ज्वेलरी व्यवसायी के यहां 525 करोड़ के अघोषित लेनदेन का पता चला है. वहीं करीब सवा सौ करोड़ रुपए का ऋण बाजार में देकर ब्याज के रूप में बड़ा मुनाफा कमाने की बात भी सामने आई है. कारोबारी ने शुरुआती पूछताछ में किसी भी स्टॉक रजिस्टर के रखरखाव से इनकार किया, लेकिन गुप्त सुरंग तक विभाग की टीम पहुंची तो प्रत्येक आइटम पर अल्फा-न्यूमेरिक सीक्रेट कोड में वास्तविक बिक्री मूल्य लिखा था. टीम कोड को क्रैक करने पर काम कर रही है. सुरंग से दो हार्ड-डिस्क और पेन-ड्राइव भी मिलीं, जिनमें कोड के रूप में विभिन्न वस्तुओं का विवरण था. जौहरी समूह ने विभिन्न व्यक्तियों को नकद ऋण दिया था, जिसकी राशि 122.67 करोड़ रुपए है. उस पर बेहिसाब ब्याज भी कमाया है. समूह ने अपने कर्मचारियों और कारीगरों के बैंक खातों के माध्यम से नकद आय भी पेश की थी. समूह में अब तक 525 करोड़ के अघोषित लेनदेन का पता चला है.

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इसी तरह एक प्रमुख बिल्डर और कॉलोनाइजर के यहां से आयकर विभाग की टीम ने बेहिसाब रसीदें, अघोषित संपत्तियों की डिटेल, नकद ऋण और एडवांस के अलावा लेनदेन का रिकार्ड जब्त किया है. इस समूह का कुल लेनदेन 650 करोड़ रुपए आंका गया है. तीसरा समूह जयपुर का एक प्रसिद्ध बिल्डर और डेवलपर है जो फार्म हाउस, टाउनशिप और आवासीय एन्क्लेव डेवपलमेंट में लगा है. सर्च ऑपरेशन से पता चला है कि इस समूह ने एयरपोर्ट प्लाजा में एक रियल-एस्टेट परियोजना को संभाला था. खाते की पुस्तकों में 1 लाख का लेनदेन दर्शाया था जबकि परियोजना से संबंधित बैलेंस शीट में 133 करोड़ रु के लेनदेन का पता चला.

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