जयपुर: झूठी निकली शिकायत, ठंडे बस्ते में 114 करोड़ का ERP प्रोजेक्ट

Smart News Team, Last updated: Sat, 26th Sep 2020, 9:10 PM IST
  • जयपुर. टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की जांच की तो फर्जीवाड़ा सामने आया है. माइक्रोसाफट कंपनी की ओर से मुख्यमंत्री को शिकायत हुई. जांच की गई तो यह शिकायत फर्जी निकली. शिकायतों और विवादों में आने के बाद चार महीने पहले ही टेंडर को निरस्त कर दिया था.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

जयपुर| राजस्थान बिजली उत्पादन निगम में इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग यानी ईआरपी प्रोजक्ट शुरू होने से ही ठंडे बस्ते में आ गया है. प्रोजक्ट का टेंडर चहेती फर्म को दिलवाने के लिए विभाग के बड़े अफसरों में खींचतान शुरू हो गई. हालांकि उत्पादन निगम की ओर से टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा किया जा रहा है.

इतना ही नहीं खुली टेंडर प्रक्रिया के तहत हैदराबाद की एक फर्म को टेंडर जारी भी किया गया. लेकिन लगातार शिकायतों और विवादों में आने के बाद चार महीने पहले ही टेंडर को निरस्त कर दिया.

खास बात यह है कि टेंडर निरस्त करने के बाद निगम ने जब टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की जांच की तो फर्जीवाड़ा सामने आया है. माइक्रोसाफट कंपनी की ओर से मुख्यमंत्री को शिकायत हुई. जांच की गई तो यह शिकायत फर्जी निकली. खुद माइक्रोसाफट कंपनी ने शिकायत का खंडन किया। अब निगम की ओर से झूठी शिकायत पर मामला दर्ज कराने की तैयारी चल रही है.

17 करोड़ कम में दिया था टेंडर

ईआरपी प्रोजक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया में तीन फर्म शामिल हुई.इसमें पहले नंबर एल वन ईसीएआईएल शामिल थी. इसने 131 कऱोड़ रुपए लगाए. रेट ज्यादा होने के कारण इस फर्म को टेंडर नहीं दिया गया. इससे 17 करोड़ कम में हैदराबाद की एक फर्म को यह टेंडर दिया गया. सूत्रों की मानें तो विभाग के अफसर इस फर्म को टेंडर दिए जाने से नाराज थे.

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यूपी में यही काम 122 करोड़ में हो रहा

यूपी में ईआरपी प्रोजक्ट की शुरूआत 21 सितंबर 2019 में हो गई. इसके लिए वहां 122 करोड़ का टेंडर जारी किया गया. यूपी में एक हजार लाइसेंस देकर यह प्रोजक्ट चल रहा है. प्रदेश की बात करें तो यहां उत्पादन निगम ने 17 करोड़ कम में यह टेंडर जारी किया है. जबकि लाइसेंस यूपी से 500 अधिक यानी 1500 दिए हैं.

उत्पादन की निगम की गलती क्या

उत्पादन निगम की ओर से टेंडर प्रक्रिया तो पूरी कर ली गई. लेकिन इसके लिए डीओआईटी की अप्रूबल नहीं ली गई. किसी भी सरकारी विभाग में 25 लाख से अधिक आईटी काम कराने के लिए सूचना प्रौद्यौगिकी विभाग की ओर से अप्रूबलइ लेनी होनी होती है. जबकि डीओआईटी की ओर से प्रजेंटेंशन भी दिया गया. अप्रूबल नहीं होने के कारण और विवादों में आए टेंडर को उत्पादन निगम ने निरस्त कर दिया. पी रमेश, एमडी राजस्थान बिजली उत्पादन निगम ने कहा कि हम जांच कर रहे हैं. टेंडर की शिकायत एक बड़ी निजी आईटी कंपनी की ओर से आई थी. यह फर्जी निकली है. हम मामला दर्ज करवा रहे हैं.

 

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