जयपुर: निगम में अब महिला पार्षदों के पति नहीं कर सकेंगे नेतागिरी, जारी हुए आदेश

Smart News Team, Last updated: Thu, 3rd Jun 2021, 1:19 PM IST
  • जयपुर के ग्रेटर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव ने एक आदेश निकाला है. इसके अनुसार किसी सभा, बैठक और वीसी में पार्षद ही भाग ले सकेंगे. उनके पति या रिश्तेदार नहीं आएंगे अब बैठकों में.
नगर निगम के आयुक्त ने जारी किए आदेश .

जयपुर. नगर निगम में महिला पार्षद की बजाय उनके पति नेतागिरी करते नजर आते हैं. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा. नगर निगम ग्रेटर आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव ने एक फरमान निकालकर साफ कर दिया है कि महिला पार्षद के पति या रिश्तेदार निगम के क्रियाकलापों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के​ लिए अधिकृत नहीं है. आदेश में यह लिखा गया है कि निगम की किसी भी सभा, बैठक और वीसी में पार्षद ही भाग ले सकेंगी. उनके पति या रिश्तेदार की उपस्थिति नियम विरुद्ध है.

 

दरअसल, कई वार्डों के आरक्षण में वार्ड महिला के लिए सुरक्षित हो जाता है तो वहां के स्थानीय नेता अपनी पत्नी को मैदान में उतार देते हैं. साख होने की वजह से पत्नी जीत जाती है और शुरू हो जाती है पार्षद पति की नेतागिरी. पार्षद घर में रहती हैं और फील्ड में पतिदेव काम करते हैं.

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वार्ड के सफाई इंस्पेक्टर या जमादार या कर्मचारी को धमकाने का काम भी ये नेताजी ही करते हैं. इसे लेकर आए दिन उच्चाधिकारियों को शिकायत मिलती रहती है, जिसके चलते यह आदेश जारी करना पड़ा है. इस आदेश में 20 साल पुराने एक आदेश का हवाला दिया है. जिसमें महिला या पुरूष जनप्रतिनिधि के रहते सरकारी ऑफिशियल बैठक में उनके प्रतिनिधियों के वहां आने पर रोक लगाई गई है.

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नगर निगम में कई बैठकों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति या उनके रिश्तेदार प्रतिनिधि के तौर पर आ जाते हैं और अधिकारियों को दिशा-निर्देश देने लगते है. इसके अलावा कोविड के दौरान कुछ बैठकें ऑनलाइन भी हुई, जिसमें भी महिला पार्षदों के बजाए उनके पति उपस्थित हुए. निगम में 33 प्रतिशत महिला पार्षद हैं. ज्यादातर के पति—पुत्र या अन्य रिश्तेदार ही फील्ड में सक्रिय नजर आते हैं. नए आदेश आने के बाद महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ, वे बढ़-चढ़ कर निगम के कार्यों में हिस्सा ले पाएंगी .

 

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