जयपुर: हाईकोर्ट में अभिभावकों को 70 फ़ीसदी ट्यूशन फीस जमा करने का दिया निर्देश

Smart News Team, Last updated: 08/09/2020 12:52 PM IST
  • निजी स्कूल और अभिभावक दोनों को मिली हाईकोर्ट से राहत राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूल फीस को लेकर सोमवार को अंतरिम आदेश जारी किया
प्रतीकात्मक तस्वीर 

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूल फीस को लेकर सोमवार को अंतरिम आदेश जारी किया है. राजस्थान हाई कोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए ट्यूशन फीस का मात्र 70 फ़ीसदी ऐसा ही जमा किए जाने का निर्देश दिया है. इसके अलावा अभिभावकों को सहूलियत देते हुए इसके समय सीमा में भी विस्तार किया है. हाईकोर्ट ने 70 की फीसदी शुल्क को तीन हिस्सों में विभाजित किया है. यानी अभिभावकों को अब 70 फ़ीसदी शुल्क तीन बार में जमा करने होंगे. राजस्थान में चल रहे अभिभावकों के प्रदर्शन व कोर्ट में दाखिल की गई याचिका के आधार पर यह निर्णय लिया गया है. इस निर्णय से अभिभावक और स्कूल दोनों को ही राहत मिली है.

कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा है कि स्कूल ट्यूशन फीस का 70 फीसदी तीन किस्तों में ले सकते हैं और फीस नहीं देने पर छात्र को ऑनलाइन क्लासेज से बाहर कर सकते हैं लेकिन स्कूल से नाम नहीं काटा जा सकता है.

राजस्थान हाईकोर्ट में सोसायटी ऑफ कैथोलिक इंस्टीट्यूशन्स, प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन सहित अन्य शैक्षणिक संगठनों ने याचिका दायर की थी. जिसमें राज्य सरकार के स्कूल फीस वसूली स्थगन आदेश को चुनौती दी गई थी.इन संगठनों से करीबन दो सौ स्कूल जुड़े हुए हैं. स्कूल संगठनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा, अधिवक्ता दिनेश यादव और शैलेष प्रकाश शर्मा सहित अन्य ने कहा कि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को स्कूल फीस वसूली स्थगित करने का आदेश नहीं दे सकते हैं. फीस वसूली रोकने की वजह से स्कूल संचालकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

स्कूल लॉकडाउन और उसके बाद लगातार अध्यापक एवं अन्य स्टॉफ को पूरा वेतन दे रहा है. इसी के साथ बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो इसी को ध्यान में रखकर लगातार ऑनलाइन कक्षाएं भी लगाई जा रही है. वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने कहा कि राज्य सरकार को पूरा अधिकार है कि जनहित में फैसला ले.

वर्तमान महामारी के इस दौर में आर्थिक स्थिति को देखते हुए फीस वसूली को स्थगित किया गया है. सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश एसपी शर्मा ने अंतरिम आदेश में कहा कि राज्य सरकार ने जो फीस वसूली का आदेश जारी किया है उसमें स्कूल प्रशासन की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया.

इसी के साथ अभिभावकों पर पूरी ट्यूशन फीस जमा करने का भार डालना भी युक्तियुक्त और न्यायसंगत नहीं होगा. इसी को देखते हुए न्यायालय ने अंतरिम आदेश में कुल स्कूल फीस में से ट्यूशन फीस के 70 फीसदी राशि जमा करने की छूट दी है.

 

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