जयपुर: सांसद दीया कुमारी ने रेलवे के कार्यकारी निदेशक से की मुलाकात

Smart News Team, Last updated: 15/08/2020 06:51 PM IST
  • रेलवे के कार्यकारी निदेशक नरेंद्र पाटील से की मुलाकात, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नवनियुक्त सदस्य सचिव ने सांसद से की वार्ता, बाघों की दुर्दशा पर सांसद दीया ने जताई चिंता.
सांसद दीया कुमारी

जयपुर- सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि क्षेत्र में रेलवे से सम्बंधित समस्याओं का समाधान होने पर आम जनता पर समय की बचत के साथ आर्थिक भार भी कम हो सकता है. रेल यात्रा आवागमन का सुगम और सबसे सस्ता साधन है. व्यापारिक दृष्टि से भी कम खर्चीला है.

सांसद दिया कुमारी ने रेल मंत्रालय से सम्बंधित सार्वजनिक शिकायत के कार्यकारी निदेशक नरेंद्र पाटील से मुलाकात कर क्षेत्र में रेलवे की मुख्य मांगों व समस्याओं के बारे में चर्चा की. जिसमें मुख्य रूप से मेड़ता पुष्कर रेलवे लाईन की स्वीकृति, चांदरूण रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण कराने, मेड़ता रोड से मेड़ता सिटी चलने वाली डीएमयू ट्रेन के संचालन हेतु आदेश करवाने, ब्यावर रेलवे स्टेशन पर बने फुट ओवरब्रिज को भील कॉलोनी तक बढ़ाये जाने, बर से बिलाड़ा, नाथद्वारा से ब्यावर और नाथद्वारा से भीलवाड़ा नई रेलवे लाइनों की स्वीकृत कराए जाने हेतु विस्तार से चर्चा की।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नवनियुक्त सदस्य सचिव ने सांसद से की वार्ता

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नवनियुक्त सदस्य सचिव एस पी यादव ने सांसद दीयाकुमारी से मुलाकात कर एनटीसीए एवं राजस्थान में बाघ संरक्षण के मुद्दों पर चर्चा की तथा पर्यावरण मंत्री द्वारा हाल ही में विमोचित की गई पुस्तक 'टाइगर्स: को-प्रेडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया' (TIGERS: COPREDATORS & PREY IN INDIA) की प्रति भेंट की।

'टाइगर्स: को-प्रेडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया की प्रति भेंट की।

इस दौरान लोकसभा में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण कमेटी की सदस्य सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि बाघों की संख्या में गिरावट और बढ़ती मृत्यु दर चिंता का विषय है. साल दर साल के आंकड़ों से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस प्रजाति के खिलाफ साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि राजस्थान में तो बाघों की स्थिति और भी भयावह है. हमें तुरंत ही ठोस रूपरेखा बनाकर इस स्थिति को सुधारने की दिशा में प्रयत्न करना चाहिए.

ज्ञात हो कि भारत में बाघों को बचाने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर शुरु किया गया था और सन् 1973 में बंगाल टाइगर को राष्ट्रीय पशु भी घोषित किया गया था।

 

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