जयपुर: गो अधिनियम में बदलाव करने से संतों में रोष, जताया विरोध

Smart News Team, Last updated: 09/09/2020 10:44 AM IST
  • जयपुर. गो अधिनियम में बदलाव किए जाने पर संत समाज ने जताया विरोध गाय शेष की राशि अन्य कार्य में खर्च करने पर संतों में रोष गोवंश का हक छिनने नहीं दिया जाएगा : संत दिनेश गिरी, गोशाला संचालक मंडल और संत समाज ने सरकार को आंदोलन की दी चेतावनी
गो अधिनियम में बदलाव

जयपुर। गो अधिनियम में सरकार द्वारा बदलाव किए जाने को लेकर संत समाज में रोष है. संत समाज ने अधिनियम पर पुनर्विचार किए जाने के लिए सरकार से मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार पुनर्विचार कर अधिनियम को संशोधित नहीं करती है तो संत समाज इसका विरोध करते हुए आंदोलन करेगा. गाय के लिए दिया जाने वाला धन किसी अन्य मद में खर्च नहीं किया जाएगा. गायों का हक़ संत समाज छीनने नहीं देगा.

सांगानेर पिंजरापोल गोशाला में स्थित सुरभि भवन में संतों ने राज्य सरकार की ओर से गाय शेष की राशि अन्य कार्यों में खर्च करने पर रोष जताया. राजस्थान गोसेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष तथा शेखावाटी फतेहपुर स्थित बुधगिरी मढ़ी के महंत दिनेश गिरी ने कहा कि हम गोमाता की कमजोर संतान नहीं है. गोमाता का हक छिनने नहीं दिया जाएगा. राज्य सरकार को गो अधिनियम में बदलाव कर गो निधी को गोसंरक्षण के लिए खर्च करना होगा.

विधानसभा में मुख्यमंत्री गहलोत ने गो अधिनियम में किया बदलाव

उन्होंने कहा कि विधानसभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गो अधिनियम में बदलाव किया है. इससे संत समाज नाराज है और इसे गो द्रोह मानता है. इस बदलाव से प्रदेश की 3 हजार से अधिक पंजीकृत गोशालाओं में 10.50 लाख से अधिक गोवंश के सामने चारे का संकट आ गया है. से में संत समाज गो निधी को दूसरे कार्यों में खर्च करने का विरोध करता है. इसमें बदलाव नहीं होने पर संत समाज आंदोलन की राह पकड़ेगा.

गो अधिनियम में बदलाव नहीं तो 21 को धरना

इस अवसर पर रैवासा पीठाधीश्वर वेदांती राघवाचार्य ने कहा कि गो संवर्धन का धन गो संरक्षण में ही लगना चाहिए. उन्होंने कहा कि गो अधिनियम में बदलाव नहीं किया तो 21 सितंबर को तहसील, मुख्यालय पर ज्ञापन व धरना दिया जाएगा.

इस मौके पर पिंजरापोल गोशाला अध्यक्ष नारायण लाल अग्रवाल, गोविंद वल्लभ, वैदेही वल्लभाचार्य, रविंद्रानन्द सरस्वती, रामदास देवरी, गोसेवा संघ के प्रदेश प्रभारी सुरेश शर्मा, गोग्राम संघ के ललित दाधीच आदि लोग मौजूद थे.

यह है प्रमुख मांगें

गोशाला के बिजली बिल में पहले 50 प्रतिशत रिबेट दी जा रही थी. कोरोना काल के दौरान यह रिबेट खत्म कर दी गई.

इससे गोशाला का बिल लाखों रुपए में आने लगा है. लिहाजा रिबेट जारी रखी जाए.

50 गोवंश वाली गोशाला को भी वर्ष पर्यंत अनुदान दिया जाए. पंजीकृत सभी गोशालाओं को 9 के बजाए 12 माह अनुदान जारी रखा जाए.

 

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