जयपुर: जस्टिस जीके व्यास बने राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष

Smart News Team, Last updated: Fri, 22nd Jan 2021, 8:03 PM IST
  • राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहे जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास स्वत: संज्ञान के तहत लिए गए निर्णयों के लिए अलग रूप से पहचाने जाते रहे हैं. गायन वादन के शौकीन जस्टिस व्यास हमेशा विधि के क्षेत्र में कामयाबी के लिए कड़ी मेहनत के साथ अनुशासन को ही प्राथमिक सीढ़ी मानते हैं. 
जस्टिस जीके व्यास

जयपुर. राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास को राजस्थान मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है. नियुक्ति की घोषणा के बाद से जस्टिस व्यास को शुभकामनाएं देने वालों का तांता लग गया है. वहीं, जस्टिस व्यास ने आम जन के मूल अधिकारों की रक्षा और पद की कर्तव्यनिष्ठा के दायित्व निर्वहन की बात दोहराई है. बीकानेर से अपनी वकालत शुरू करने वाले जीके व्यास 13 जून, 2005 को न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हुए थे. वे 13 साल तक राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहे और वर्तमान में जोधपुर में रहते हैं.

बीकानेर के बाद उन्होंने जोधपुर में भी वकालत की प्रेक्टिस की. वकालत के साथ-साथ समाज सेवा और धार्मिक क्रियाकलापों में भी जस्टिस व्यास सदैव ही अग्रणी रहे. वकालत में भी उन्होंने जरूरतमंद और गरीब व्यक्तियों की नि:शुल्क पैरवी की. न्यायाधीश के तौर पर भी जस्टिस जीके व्यास स्वत: संज्ञान के तहत लिए गए निर्णयों के लिए अलग रूप से पहचाने जाते रहे हैं. प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास के घर परिवार से लेकर न्यायपालिका और समाजसेवा के क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें फोन पर बधाइयां दे रहे हैं. वहीं, जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास के घर पर मिठाइयां खिलाने व बधाई देने वालों का तांता लग गया. गायन वादन के शौकीन जस्टिस व्यास हमेशा विधि के क्षेत्र में कामयाबी के लिए कड़ी मेहनत के साथ अनुशासन को ही प्राथमिक सीढ़ी मानते हैं. 

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अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने कहा कि उनका सबसे बड़ा दायित्व रहेगा कि लोगों के मूल अधिकारों से जुड़े कामों को सकारत्मकता के साथ संपूर्ण करना. ऐसे मामले उनके संज्ञान में आएंगे तो उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके. सरकार ने उन पर जो विश्वास किया है, उस कार्य को पूरा करने के लिए उन्हें लोगों के सहयोग की भी अपेक्षा रहेंगी, जिससे सबके साथ मिलकर आमजन के अधिकारों की रक्षा की जा सके.

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