CM गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान से राजनीतिक नियुक्तियों में फंसा पेच

ABHINAV AZAD, Last updated: Sun, 26th Dec 2021, 2:19 PM IST
  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान की वजह से राजस्थान में पिछले तीन साल से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियां नहीं मिली है. राजस्थान में तकरीबन 40 बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां और 15 के आस-पास संसदीय सचिवों की नियुक्ति होनी है.
सचिन पायलट बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के पक्ष में नहीं हैं.

जयपुर. राजस्थान में एक बार फिर राजनीतिक नियुक्तियां अटक गई है. दरअसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान को इसकी वजह माना जा रहा है. कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पिछले तीन साल से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन अब तक नियुक्तियां नहीं मिली हैं. बताया जा रहा है कि राजस्थान में तकरीबन 40 बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां और 15 के आस-पास संसदीय सचिवों की नियुक्ति होनी है. ऐसा कहा जा रहा है कि सीएम अशोक गहलोत पायलट गुट के किसी भी विधायक को राजनीतिक नियुक्तियां देने के लिए तैयार नहीं हैं.

मिली जानकारी के मुताबिक, सचिन पायलट कैंप संख्या के अनुपात में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग कर रहा है. बहरहाल, राजस्थान प्रदेश प्रभारी अजय माकन दोनों नेताओं के बीच खींचतान को कम करने के लिए बीच का रास्ता निकालने में जुटे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने से नाराज चल रहे विधायकों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीतिक नियुक्तियां देकर खुश करना चाहते हैं. ताकि बगावत को रोका जा सके. दरअसल, सीएम गहलोत चाहते हैं कि संसदीय सचिव पूरी तरह से विधायकों को ही बनाया जाएगा.

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मिली जानकारी के मुताबिक, सचिन पायलट चाहते हैं कि राजनीतिक नियुक्तियो में उसके समर्थकों को बराबर की भागीदारी दी जाए. लेकिन सचिन पायलट खेमे से संसदीय सचिव बनाने में शेयरिंग पैटर्न पर बात अटक गई है. बताया जा रहा है कि अब तक पायलट कैंप को राजनीतिक नियुक्तियां में उनकी मांगों के हिसाब से सहमति नहीं बनी है. वहीं सीएम गहलोत शेयरिंग पैटर्न को मानने के लिए तैयार नहीं है. हालांकि ऐसा संभावना है कि सहमति बनते ही कांग्रेस नेताओं को राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियां मिल जाएंगी. जानकार बताते हैं कि सचिन पायलट बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के पक्ष में नहीं हैं. पायलट चाहते हैं कि राजनीतिक नियुक्तियों में कांग्रेस बैकग्राउंड से जुड़े विधायकों को वरीयता दी जाए. नतीजतन, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच ठनी हुई है.

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