राजस्थान कांग्रेस कलह: धारीवाल ने डोटासरा की नहीं सुनी, क्या करेंगे गहलोत ?

Smart News Team, Last updated: Sat, 5th Jun 2021, 6:36 PM IST
  • अशोक गहलोत सरकार में कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा के विवाद ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान कांग्रेस के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
राजस्थान में फिर गरमाई राजनीति .

जयपुर. राजस्थान कांग्रेस भले ही एकजुट होने का दावा करती है लेकिन अशोक गहलोत सरकार के कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच हुए विवाद से आंतरिक कलह फिर सामने आई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री डोटासरा के बीच विवाद की वजह है पार्टी के आदेश को भी प्रदेश अध्यक्ष के कहने के बावजूद अनसुना कर देना.

दरअसल, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पिछले दिनों राज्यों को केंद्र सरकार से फ्री वैक्सीन मिलने को लेकर सभी जिलों में कांग्रेस नेताओं से डीएम को ज्ञापन देने के लिए कहा था. इस संबंध में राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत ने अपने निवास पर मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई थी.

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सूत्रों की मानें तो राजस्थान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी का यह आदेश सभी को मानने के लिए कहा था. बैठक में डोटासरा ने कहा कि फ्री वैक्सीनेशन के लिए राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाए और उसके बाद प्रभारी मंत्री जिलों में प्रेस वार्ता करें.

सूत्रों की मानें तो गहलोत के कद्दावर मंत्री और मंत्रिमंडल में डोटासरा के सीनियर मंत्री धारीवाल ने प्रदेश की बात नहीं सुनी. बैठक में डीएम को ज्ञापन सौंपने के विरोध में धारीवाल ने प्रदेश अध्यक्ष को टोकते हुए कहा था की मंत्री कलेक्टर को ज्ञापन क्यों दें, हमें सीधे राष्ट्रपति को ज्ञापन देना चाहिए.

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जयपुर के प्रभारी मंत्री होने के नाते धारीवाल ने डीएम को फ्री वैक्सीन को लेकर ज्ञापन भी नहीं सौंपा. ना ही उन्होंने प्रेस वार्ता की. साथ ही ज्ञापन देने से पूर्व पदाधिकारियों की बैठक में भी वे शामिल नहीं हुए.

वहीं प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में गोविंद सिंह डोटासरा ने जब प्रेसवार्ता की तो जब उनसे धारीवाल की अनुपस्थिति के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि जयपुर में 'मैं हूं ना.' उन्होंने कहा कि हमारे वरिष्ठ नेता प्रोटोकॉल की पालन ज्यादा ही करते हैं. 

प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि मंत्री धारीवाल को लगा कि जब प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री यहां राज्यपाल को ज्ञापन देंगे तो प्रेस वार्ता भी करेंगे. इसलिए आज प्रेस वार्ता एक ही हो सकती थी. ऐसे में उन्होंने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्पेस दिया कि प्रदेशाध्यक्ष अपनी बात रखें. वे कल या परसों खुद आ जाएंगे और अपनी बात रखेंगे.

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