राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने की मांग फिर उठी, वसुंधरा का सीएम गहलोत को पत्र

Naveen Kumar, Last updated: Fri, 18th Feb 2022, 5:23 PM IST
  • राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सीएम अशोक गहलोत को हाल ही में पत्र लिखकर एक बार फिर राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने की मांग की है. वसुंधरा ने पत्र में लिखा है कि बिना संवैधानिक मान्यता के राजस्थानी भाषा को राजभाषा नहीं बनाया जा सकता.
फाइल फोटो

जयपुर. राजस्थानी भाषा को मान्यता ​दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहा है. विधायकों और सांसदों द्वारा केंद्र सरकार को इस बाबत कई बार पत्र भेजा जाता रहा है, लेकिन अब तक राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिल सकी है. इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सीएम अशोक गहलोत को हाल ही में पत्र लिखकर एक बार फिर राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने की मांग की है. राजे के इस पत्र के बाद सियासी गलियारों में एक नई बहन छिड़ गई है. वसुंधरा ने पत्र में लिखा है कि बिना संवैधानिक मान्यता के राजस्थानी भाषा को राजभाषा नहीं बनाया जा सकता. वसुंधरा के इस पत्र के बाद अब कई अन्य सामाजिक संगठन भी राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए आगे आए हैं. उन्होंने भी सीएम गहलोत से राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने की मांग रखी है.

आपको बता दें कि 25 अगस्त 2003 को अशोक गहलोत ने भी राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार से गुजारिश की थी. उस वक्त भी गहलोत प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए भेजा गया था. इसके बाद 2006 में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने इसे सैद्धांतिक सहमति भी दे दी, लेकिन आगे कुछ हो ना सका. 18 साल बाद भी राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव अटका हुआ है.

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इस वसुंधरा राजे ने एक बार ​फिर पत्र​ लिखकर कहा, राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाया जाए. गोवा में गोवा, दमन-दीव, राजभाषा अधिनियम 1987 से कोंकणी भाषा को राजभाषा बनाया है. छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ राजभाषा अधिनियम संशोधन 2007 से छत्तीसगढ़ी भाषा समेत 17 भाषाओं को राजभाषा बनाया गया है. वसुंधरा के बाद सीपीएम विधायक बलवान पूनिया समेत कई विधायकों ने गहलोत सरकार से गुहार लगाई है.

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