राजस्थान में उभरा संकट, भाजपा और वसुंधरा राजे समर्थकों के बीच कलह, जानें मामला

Smart News Team, Last updated: Tue, 12th Jan 2021, 10:41 AM IST
  • राजस्थान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं किए जाने के बाद प्रदेश बीजेपी में कलह देखने को मिल रहा है. वसुंधरा राजे के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर मंच बनाए जाने के बाद राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के समर्थक भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हो गए हैं. हालांकि सतीश पूनिया ने अपने नाम से बने मंच को खारिज किया है.
वसुंधरा राजे समर्थकों और भाजपा में तकरार.

जयपुर. बीजेपी नेता और राजस्थान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थक और उनके विरोधी आमने सामने आ गए हैं. वसुंधरा राजे को भाजपा राजस्थान नेताओं की बैठक में नहीं बुलाने पर उनके समर्थक नाराज हैं. पूर्व सीएम वसुंधरा के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एक मंच बनाने की घोषणा कर दी है जिसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी.

बता दें कि राजस्थान में तीन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है जिसमें भाजपा को इस कलह का नुकसान झेलना पड़ सकता है. बीजेपी के नेता फिलहाल इस मामले पर नजर रख रहे हैं. राजस्थान में वसुंधरा राजे को दरकिनार करके पकड़ बनाना अभी संभव नहीं है लेकिन बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व राज्य पर अपनी पकड़ को मजबूत करना चाहता है. यही कारण है कि राजस्थान उपचुनाव और राजनीतिक मुद्दों की चर्चा करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया अन्य नेताओं के साथ दिल्ली पहुंचे थे तो उस बैठक में वसुंधरा राजे शामिल नहीं थीं. 

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वसुंधरा राजे के बैठक में शामिल नहीं होने के बाद उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मंच बनाकर मुहिम शुरू की थी जिसका विरोध प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने किया था. सतीश पूनिया ने इस मामले पर कहा था कि पार्टी व्यक्ति नहीं संगठन से चलती है. साथ ही उनका कहना था कि इस मंच से जुड़े लोग बीजेपी के सक्रिय सदस्य नहीं हैं.  

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सतीश पूनिया के इस बयान के बाद उनके समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर मंच बना दिया था. सतीश पूनिया ने अपने नाम से बने इस मंच को खारिज किया है और इसे सोशल मीडिया पर किसी की शरारत बताया है.

बता दें कि लगभग एक दशक में बीजेपी के केंद्रीय नेतृतव और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच कलह देखने को मिल रहे हैं. वसुंधरा राजे की प्रदेश राजस्थान की जनता पर मजबूत पकड़ रही है जिसे देखते हुए भाजपा में वह सर्वमान्य नेता बनी रहीं लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय नेतृत्व ने मौजदूा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहा था लेकिन वसुंधरा राजे इस पक्ष में नहीं थी जिसके कारण शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष का पद नहीं सौंपा गया. 

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शेखावत पर विचार करने के बाद मदनलाल सैनी को राजस्थान भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन उनकी निधन के बाद सतीश पूनिया को अध्यक्ष पद सौंपा गया. राजस्थान में बीते साल कांग्रेस में सचिन पायलट की बगावत के बाद बीजेपी भी दो खेमों में बंटी नजर आई थी. 

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