जयपुर : पाक विस्थापितों को नागरिकता के लिए राजस्थान सरकार का केंद्र को पत्र

Smart News Team, Last updated: 12/01/2021 08:54 PM IST
  • राजस्थान में करीब 24 हजार पाक विस्थापित निवास कर रहे हैं. सरकार ने पाक विस्थापितों को नियम में छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. राज्य सरकार ने केंद्र से कहा है कि 31 दिसंबर 2013 को या इससे पहले भारत आए लोगों को पारपत्र बढ़वाने की छूट यदि दी जाती है तो राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. 
राजस्थान विधान सभा

जयपुर. राजस्थान में बड़ी संख्या में पाक विस्थापित हिंदु अल्पसंख्यक रह रहे हैं. लेकिन, नियमों की जटिलता के कारण उन्हें भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. ऐसे में अब राजस्थान सरकार ने पाक विस्थापितों को नियम में छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. 

इस पत्र में राज्य सरकार ने मांग की है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के 2014 के एक आदेश के मुताबिक 31 दिसंबर 2009 या इससे पहले भारत आए अफगान और पाकिस्तान अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य को भारतीय नागरिकता के लिए वैध पारपत्र की जरूरत नहीं है. इनमें पाकिस्तान औेर अफगान से आए हिंदु और सिख शामिल हैं. ऐसे में राज्य सरकार ने केंद्र से कहा है कि 31 दिसंबर 2013 को या इससे पहले भारत आए नागरिकों को पारपत्र बढ़वाने की छूट यदि दी जाती है तो राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. राज्य ने केंद्र से इस बारे में लिए जाने वाले निर्णय से अवगत कराने के लिए भी कहा है, जिससे लंबित नागरिकता प्रकरणों पर विचार किया जा सके. बता दें कि राज्य में करीब 24 हजार पाक विस्थापित निवास कर रहे हैं. भविष्य में इनमें से पात्र नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जानी है.

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गृह विभाग ने केंद्र से कहा है कि 31 दिसंबर, 2009 के बाद भारत आए पाक नागरिकों को भारतीय नागरिकता के लिए वैध पारपत्र की जरूरत होती है. इस पारपत्र की अवधि बढ़वाने के लिए पाकिस्तान दूतावास की ओर से प्रति व्यक्ति आठ हजार रुपए का शुल्क लिया जा रहा है. जबकि राज्य में रह रहे अधिकांश पाक विस्थापित गरीब श्रेणी के हैं. ये लोग यह शुल्क जमा कराने में असमर्थ हैं. इसके चलते वे भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर पाते हैं. इस संबंध में राज्य के गृह विभाग के ग्रुप चार के संयुक्त शासन सचिव रामनिवास मेहता ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेश अनुभाग के अवर सचिव को पत्र लिखा है.

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