जयपुर: पूर्व मेयर की याचिका में कोर्ट का फैसला सुरक्षित, पक्षकार पर लगा हर्जाना

Smart News Team, Last updated: Mon, 14th Jun 2021, 11:15 PM IST
  • राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्रेटर नगर निगम की निलंबित महापौर सौम्या गुर्जर की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने मामले में पक्षकार पर पचास हजार रुपए का हर्जाना लगा दिया है.
जयपुर ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर के द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है.

 राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्रेटर नगर निगम की निलंबित महापौर सौम्या गुर्जर की अपने निलंबन के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. वहीं अदालत ने मामले में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र पेश करने वाले मोहनलाल नामा पर पचास हजार रुपए का हर्जाना लगा दिया है. अदालत ने कहा कि नामा ने पब्लिसिटी स्टंट और सुनवाई में देरी करने के उद्देश्य से प्रार्थना पत्र पेश किया है. न्यायाधीश पंकज भंडारी और न्यायाधीश सीके सोनगरा की खंडपीठ ने यह आदेश सौम्या गुर्जर की याचिका पर दिए.

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अपनी बहस में कहा कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 39 के तहत दुर्व्यवहार के आधार पर जनप्रतिनिधि को हटाया जा सकता है. दुर्व्यवहार को किसी परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता है. ऐसे में याचिकाकर्ता का निलंबन संविधान के अनुकूल है. इसके अलावा निगम का कार्य आवश्यक सेवा में आता है. इसलिए नोटिस का जवाब देने के लिए रविवार को याचिकाकर्ता को बुलाना विधि सम्मत था. यदि सफाई करने वाली कंपनी को भुगतान नहीं किया जाता तो यह अदालती अवमानना होती. 

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महाधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने धारा 39 की वैधानिकता को चुनौती देने की आड में अपने निलंबन के खिलाफ याचिका दायर की है. ऐसे में प्रकरण की सुनवाई एकलपीठ को करनी चाहिए और जांच अधिकारी की प्रारंभिक जांच के खिलाफ ज्यूडिशियल रिव्यु नहीं किया जा सकता. विरोध में पूर्व महापौर की ओर से कहा गया कि यदि प्रारंभिक जांच में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी होती है तो ज्यूडिशियल रिव्यु किया जा सकता है. 

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सुनवाई के दौरान कार्यवाहक महापौर शील धाभाई की ओर से अधिवक्ता एससी गुप्ता ने अदालत को कहा कि कोर्ट को मामले में स्टे देना चाहिए या याचिका को निस्तारण के लिए जुलाई माह में सूचीबद्ध करना चाहिए. इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुर्सी सबको प्यारी होती है, क्या मामले की सुनवाई छह माह के लिए टाल दें. इसके बाद अधिवक्ता गुप्ता सुनवाई से बाहर हो गए.

 

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