राजस्थान में विधान परिषद के गठन को गहलोत सरकार के कैबिनेट ने दी मंजूरी

Smart News Team, Last updated: Thu, 8th Jul 2021, 6:20 PM IST
  • इससे पहले भी 2008 में तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने और उसके बाद 2012 में गहलोत ने सरकार ने विधान परिषद के गठन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था. 
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव विधानसभा के जरिए लोकसभा में भेजा जाएगा.

प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सूबे की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कैबिनेट ने एक बार फिर बड़ा सियासी फैसला लेते हुए विधानपरिषद के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव विधानसभा के जरिए लोकसभा में भेजा जाएगा. गौरतलब है कि इससे पहले भी 2008 में तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने और उसके बाद 2012 में गहलोत ने सरकार ने विधान परिषद के गठन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था. अगर विधान परिषद के गठन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार के मंत्रिमंडल का दायरा बढ़ जाएगा और विधान सभा और विधान परिषद के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत के बराबर सरकार मंत्री बना सकती है.

छह राज्यों में काम कर रही है विधान परिषद्

विधान परिषद कुछ भारतीय राज्यों में लोकतन्त्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है. इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं. कुछ सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनित किए जाते हैं. विधान परिषद विधानमण्डल का अंग है. वर्तमान में देश के छह राज्यों आन्ध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में विधान परिषद है. इसके अतिरिक्त, राजस्थान, असम, ओडिशा को भारत की संसद ने अपने स्वयं के विधान परिषद बनाने की स्वीकृति दे दी है.

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यह होती विधान परिषद्

विधान परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्षों का होता है लेकिन प्रत्येक दो साल पर एक तिहाई सदस्य हट जाते हैं. विधान परिषद में एक स्थायी निकाय है जिसे भंग नहीं किया जा सकता है. विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष की अवधि के लिए कार्य करता है. एक परिषद के सदस्यों में से एक तिहाई की सदस्यता हर दो साल में समाप्त हो जाती है. यह व्यवस्था राज्य सभा, के सामान है.

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