राजस्थान मैरिज एक्ट में अनिवार्य रजिस्ट्रेश अधिनियम के खिलाफ उतरे NGO और महिला सगंठन

Prachi Tandon, Last updated: Wed, 29th Sep 2021, 7:04 AM IST
  • राजस्थान सरकार के मैरिज एक्ट में संशोधन करने के बाद राज्य में कई एनजीओ और महिला संगठनों ने अपना विरोध जताया है. गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि कम उम्र की शादी के रजिस्ट्रेशन को अनुमित मिलना सीधे बाल विवाह को मंजूरी मिलना है. 
राजस्थान में एनजीओ और महिला संगठन गहलोत सरकार के इस फैसले के खिलाफ उतरे.(सांकेतिक फोटो)

जयपुर. राजस्थान मैरिज एक्ट में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन अधिनियम को लेकर कई गैर सरकारी सगंठनों ने विरोध जताया है. राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने हाल ही में मैरिज एक्ट में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के बाद किसी भी उम्र में की गई शादी का रजिस्ट्रेशन हो सकेगा. एनजीओ इस बात के खिलाफ हैं कि इस तरह का अधिनियम राज्य में एक बार फिर से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देगा. राजस्थान सरकार के मैरिज एक्ट में संशोधन करने से बाल विवाह को कानूनी तौर पर वैधता मिल जाएगी. जो पूरी तरह से गलत है.

राजस्थान में बाल विवाह के खिलाफ काम करने वाले एक एनजीओ सारथी ट्रस्ट की कृर्ति भाटी ने कहा कि मैरिज एक्ट में इस तरह का संशोधन अस्वीकार्य है. यह फैसला समाज को पीछे धकेलने वाला है. सारथी ट्रस्ट की कार्यकर्ता ने कहा लगता है राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को गलत तरह से समझ लिया है. एससी के ऑर्डर में किसी तरह से बाल विवाह को रजिस्टर करना बताया गया है. इसी के साथ कृति ने कहा कि अगर सरकार को किसी भी प्रकार का संदेह है तो उन्हें स्पष्टीकरण के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए. 

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राजस्थान में 1500 बाल विवाह रोकने और 43 से ज्यादा कैंसिल कराने वाली कृति भाटी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कानून में संशोधन करने से पहले जनता की राय लेनी चाहिए लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. सार्थी ट्रस्ट की सोशल वर्कर कृति भाटी ने कहा कि यह संशोधन बाल विवाह को खत्म करना और मुश्किल बना देगा. सोशल वर्कर कृति भाटी ने कहा राजस्थान में बाल विवाह के मामले कम नहीं हुए हैं बल्कि उनको कम रिपोर्ट किया गया है. कृति ने कहा कि इस संशोधन में जो कानूनी वैधता मिल रही है इसके बाद बाल विवाह के मामले और बढ़ जाएंगे. 

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पीपल्स यूनियन फॉक सिविल लिबर्टीज की महासचिव कविता श्रीवास्तव ने कहा कि कम उम्र में हुए विवाह के पंजीकरण को अनुमति मिलना सीधे बाल विवाह को मंजूरी मिलना है. सरकार को संशोधन से पहले परामर्श करना चाहिए था. 

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