पुरुष प्रधान, म्हारो राजस्थान: साक्षरता दर में बेटों के मुकाबले बेटियां काफी पीछे

SHOAIB RANA, Last updated: Thu, 9th Sep 2021, 3:27 PM IST
  • आजादी के 74 साल बाद भी राजस्थान में महिलाओं को शायद पुरुषों के बराबर अधिकार नहीं मिल पाए हैं. राज्य में महिला और पुरुषों की साक्षरता दर को लेकर आई एनएसओ की रिपोर्ट इस बात का सबूत भी पेश कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में साक्षरता का लैंगिक अंतर 23 प्रतिशत से ज्यादा है जिस वजह से इस मामले में राजस्थान देश का सबसे फिसड्डी राज्य बन गया है.
साक्षरता दर में बेटों के मुकाबले बेटियां काफी पीछे

जयपुर. देश में टूरिस्टों के हब से एक राजस्थान शिक्षा के मामले में देश में सबसे ज्यादा लैंगिग असमानता वाला प्रदेश है. यहां महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का साक्षरता दर कहीं ज्यादा है जो इस मामले में राजस्थान को देश का सबसे फिसड्डी राज्य बनाता है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की जारी एक रिपोर्ट में राजस्थान में महिला शिक्षा को लेकर ऐसे ही कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. एनएसओ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017-18 के दौरान राजस्थान में पुरुषों की साक्षरता दर 80.08 फीसदी और महिलाओं की महज 57.6 फीसदी दर्ज की गई.

राजस्थान के जालोर और सिरोही इलाकों में पुरुषों के महिलाओं की साक्षरता दर सबसे खराब हालत में है. जहां जालोर में महिलाओं का साक्षरता दर 38.47 तो सिरोही में मात्र 39.73 फीसदी है. वहीं टोंक जिले का कोटरा ब्लॉक सबसे खराब महिला साक्षरता दर वाला ब्लॉक है जहां आकंड़ा महज 16.49 प्रतिशत ही है.

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राजस्थान यूनिवर्सिटी के एक विभाग की प्रमुख रश्मि जैन इस बारे में कहती हैं कि राजस्थान में जहां भी शिक्षा की बात आती है तो घरवाले प्राइमरी स्तर पर उनके साथ भेदभाव शुरू कर देते हैं. रश्मि कहती हैं कि ऐसा भी तब हो रहा जब केंद्र और राज्य सरकारें स्कूल-कॉलेजों में लड़कियों के दाखिले का अनुपात सुधारने के लिए हर तरह का प्रयास कर रही है.

रश्मि कहती हैं कि सिर्फ सरकारी योजनाएं या नीतियां बनाकर परेशानी का हल नहीं निकलेगा, अब समय आ गया है कि लड़कियों को पढ़ाने-लिखाने के लिए अपना नजरिया बदला जाए.

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