राजस्थान: भूखंड पर निर्माण नहीं किया तो इतने दिनों में आवंटन होगा निरस्त

Smart News Team, Last updated: Thu, 1st Jul 2021, 6:42 PM IST
  • शहरी निकायों द्वारा अपने क्षेत्रों में आवंटित भूखंडों का सर्वे किया जाएगा. इस आधार पर निरस्त करने वाले भूखंडों की सूची बनाई जाएगी. इसके बाद शहरी निकायों द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे और फिर भूखंडधारी की आपत्ति-सुझाव सुनने के बाद निरस्तीकरण प्रक्रिया होगी.
भूखंडधारी को तय समय में करना होगा निर्माण

राजस्थान में भूखंडधारी को अब निर्धारित समय में ही भूखंड पर निर्माण करना होगा. ऐसा नहीं करने पर भूखंड का आवंटन निरस्त हो जाएगा. इसमें नीलामी से आवंटित, चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आवंटित करवाएं भूखंड और नियमन शिविर के जरिए लिए गए पट्टेशुदा भूखंड शामिल है. इसके लिए शहरी निकायों द्वारा अपने क्षेत्रों में ऐसे भूखंडों का सर्वे किया जाएगा. 

इस आधार पर निरस्त करने वाले भूखंडों की सूची बनाई जाएगी. इसके बाद शहरी निकायों द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे और फिर भूखंडधारी की आपत्ति-सुझाव सुनने के बाद निरस्तीकरण प्रक्रिया होगी. सरकार के इस आदेश के पीछे मकसद है कि प्रशासन शहरों के संग अभियान में काम का ज्यादा से ज्यादा आंकड़ा जुटाना भी है.

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नगरीय विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए है. संबंधित निकायों को प्रशासन शहरों के संग अभियान 2 अक्टूबर से पहले आवंटन निरस्तीकरण की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं. जिन मामलों पर फैसला राज्य सरकार स्तर पर होगा, उन्हें 31 अगस्त तक सरकार को भेजना होगा. इसके लिए तत्काल प्रभाव से सर्वे शुरू किया जाएगा.

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आवंटित भूखंड पर निर्माण के लिए यह समय है निर्धारित

निलामी से आवंटित भूखंड पर निर्माण अवधि कब्जा लेने के बाद से 5 वर्ष है. पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट, इंस्टीट्यूशन या अन्य संस्थानों को आवंटित भूखंड मामले में 4 वर्ष, कृषि से अकृषि उपयोग के लिए भू-उपयोग परिवर्तन नियम के तहत जमीन का पट्टा जारी होने की तिथि से 4 वर्ष. वहीं पेनल्टी के साथ अधिकत 10 वर्ष तक निर्माण करने की छूट है.

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