जयपुर में दिखी दुर्लभ चिड़िया, साइबेरियन बर्ड लेसर वाइट फ्रंटिड गूज़ शहर में

Smart News Team, Last updated: 05/03/2021 08:53 PM IST
  • जयपुर में गुरुवार को एक चिड़िया लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई. यह साइबेरियन चिड़िया जयपुर में पहली बार दिखाई दी, जो बेहद ही खूबसूरत थी. इस चिड़िया का नाम 'लेसर वाइट फ्रंटिड गूज़' है.
फाइल फोटो

जयपुर. जयपुर में लोगों के बीच उस उत्सुकता फैल गई, जब राजधानी के बाहरी इलाके चंदलाई बरखेड़ा में एक बेहद ही खूबसूरत और दुर्लभ चिड़िया दिखी. टुंड्रा वनों की मूलनिवासी इस चिड़िया का नाम 'लेसर वाइट फ्रंटिड गूज़' है. यह चिड़िया जयपुर में पहली बार दिखाई दी है. राजस्थान या आसपास के प्रदेशों में भी यह शायद ही कहीं दिखाई देती हो. डार्क चॉकलेट ब्राउन रंग, दमकता सफेद माथा और चोंच एकदम पिंक कलर की यह चिड़िया फिलहाल जयपुर में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. दस साल पहले यह चिड़िया एक बार तब चर्चा में आई थी, जब इसे सरिस्का बाघ परियोजना से लगती आबादी टहला के आसपास देखा गया था. दरअसल, यह पक्षी 'एग्रीमेंट ऑन दॅ कंजर्वेशन ऑव ऐफ्रिकन-यूरेशियन माइग्रेटरी वाटरबर्ड्स (एईडब्लूए)' के तहत 'क्रिटिकली एंडेंजर्ड' श्रेणी में है।

पक्षी प्रेमी और प्रकृतिविद राजपालसिंह शेखावत बताते हैं, यह वाक़ई दुर्लभ पक्षी है और यह जयपुर में पहली बार और प्रदेश में दस साल बाद दूसरी बार देखा गया है. यह ग्रेटर वाइट फ्रंटेड गूज़ जैसा ही है. यह यूरोप के जंगलों में ही अधिकतर रहता है और कभी-कभार बाहर आता है, लेकिन फिर भी भारत या पाकिस्तान की तरफ़ भूले भटके या मन में लहर उठने पर आ जाए तो आ जाए."

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राजपालसिंह बताते हैं, यह 2013 में गुजरात में दिखाई दी थी तो 'जर्नल ऑव दॅ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी' ने इस पर 'फस्ट रिकॉर्ड ऑव लेसर वाइट-फ्रंटिड गूज़ फ्रॉम गुजरात' शीर्षक से रिपोर्ट छापी थी. कई देशों में यह कुछ महीने रहती है तो लोग इसकी आवभगत महीनों बाद घर लौटी बेटी की तरह करते हैं. पक्षीविदों का कहना है कि यह सदा या तो योरोप में रहती है या फिर उत्तरीय इलाकों में। भारत और पाकिस्तान के बाहरी इलाकों में इसे कभी-कभार देखा जाता है. यह सोवियत रूस के बेहद ठंढ़क वाले ऊपरी इलाकों में अंडे देती और प्रजनन करती है.

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