सुप्रीम कोर्ट ने दिया अभिभावकों को बड़ा झटका, देनी होगी 2020-21 सत्र की 100% फीस

Smart News Team, Last updated: Tue, 9th Feb 2021, 2:48 PM IST
  • सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों को बड़ा झटका देते हुए कोरोना काल के दौरान 2020-21 शैक्षणिक सत्र की पूरी फीस देने का अभिभावकों को आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर)

जयपुर: कोरोना काल में जहां सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया. वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के अभिभावकों को बड़ा झटका दिया है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 70 लाख अभिभावकों को सत्र 2020-21 की पूरी फीस भरने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिए अंतरिम आदेश में कहा- 70 लाख अभिभावकों को कोरोना काल में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की 100% फीस निजी स्कूलों को देनी होगी. हालांकि, यह फीस उतनी ही होगी, जितनी शैक्षणिक सत्र 2019-20 में थी. अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 5 मार्च से 6 मासिक किस्तों में फीस का भुगतान करने को कहा है. हालांकि, जो भी पैरेंट्स फीस स्कूलों में जमा नहीं करवा पाए, उनके बच्चे का नाम नहीं काटा जाएगा.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भी कहा कि वे स्कूलों के आरटीई एडमिशन की बकाया राशि एक माह के अंदर दें. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के 18 दिसंबर के आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें निजी स्कूल संचालकों को 70% फीस वसूल करने की छूट दी गई थी. वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला अप्रैल में देगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मैनेजिंग कमेटी सवाई मानसिंह विद्यालय, गांधी सेवा सदन, सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस, भारतीय विद्या भवन सोसायटी की फी-रेग्युलेशन एक्ट 2016 को चुनौती देने वाली एसएलपी पर संयुक्त सुनवाई करते हुए दिया.

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सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना काल में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की निजी स्कूलों की फीस वसूली मामले में अंतरिम आदेश देते हुए कोरोना काल की वहीं शत प्रतिशत फीस तय की है जो शैक्षणिक सत्र 2019-20 में थी. साथ ही अभिभावकों को छह महीने में स्कूल फीस देने के लिए कहा है और फीस की पहली किस्त 5 मार्च से शुरू होगी. बता दें, 10वीं व 12वीं के बच्चों को भी फीस जमा न कराए जाने पर परीक्षा में बैठने से वंचित नहीं किया जाएगा.

वहीं, इस मामले में अभिभावकों की ओर से वकील सुनील समदड़िया ने कहा कि कोरोना काल में अभिभावकों की आर्थिक स्थिति सही नहीं है. ऐसे में 100 फीसदी फीस का भुगतान करना संभव नहीं है. इसलिए हाईकोर्ट के आदेश के पालन में अभिभावकों से ट्यूशन फीस का 70 फीसदी ही लिया जाए. ताकि उन्हें थोड़ी राहत मिल सके. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अभिभावकों को बड़ा झटका लगा है.

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