राजस्थान के पुलिस थानों से ले जाएं 50 रूपए में स्कूटर और 100 रूपए में बाइक

Smart News Team, Last updated: 07/09/2020 09:57 PM IST
  • राजस्थान के पुलिस थानों में जप्तशुदा पुराने वाहनों की बोली में खाकी पर दलालों से मिलीभगत सामने आई है. जिसमें 50 रूपए में स्कूटर और 100 रूपए में बाइक की बोली लगा कर छोड़ने की सनसनीखेज जानकारी सामने आई है. अब पुलिस महानिदेशक ने इसके लिए उच्च स्तरीय जांच कमेटी बना कार्यवाही शुरू कर दी है.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

राजस्थान में अगर आप रहते हैं और पुराना वाहन खरीदने के लिए इधर उधर दौड़ लगा रहे हैं तो जरा रूक जाइये और आप सीधे प्रदेश के पुलिस थानों में चले जाइये जहां आपको महज 50 से 100 रूपए में बाइक मिल जाएगी. चौंकिए मत, पुलिस थानों में जप्त वाहनों की नीलामी कुछ इसी दर पर होती है और ये नीलामी की दरें बोली की निविदा से पहले से ही तय हो जाती हैं.

दरअसल प्रदेश के थानों में पुलिस एक्ट में जब्त वाहन सालों तक लावारिस पड़े रहने के बाद उनकी बोली लगा कर नीलामी कर दी जाती है. हर किसी को इस नीलामी का इंतजार रहता है. लेकिन इन वाहनों की नीलामी की इतनी कम कीमत होती है कि आपको विश्वास भी नहीं होगा.

हाल ही में एक सनसनीखेज मामला जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के पूर्व जिले के कुछ थानों में उजागर हुआ है. जहां नीलामी कमेटी ने दुपहिया वाहन स्कूटर की कीमत 50 रूपए और बाइक की कीमत 100 रख कर दिया और इन्हें नीलाम तक कर दिया. वाहन नीलामी में हुई यह गड़बड़ तो एक मात्र नहीं है. प्रदेश के सभी थानों में हुए वाहनों की नीलामी की जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे होंगे. अब शिकायतों के बाद पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने निर्देशों के बाद जांच पड़ताल शुरू हो गई है.

जानकारी मिली है कि थानों में जब्त वाहनों की नीलामी के लिए डीसीपी कमेटी गठित करते है. इस कमेटी में सर्किल के एसीपी, डिप्टी एसपी, थाना प्रभारी और सहायक लेखाधिकारी मुख्यालय होते हैं.

नीलाम होने वाली वाहन की कीमत संचित परिवहन निरीक्षक की ओर से भी तय की जाती है. एमटीओ की भूमिका भी वाहन की कीमत तय करने में अहम होती है. कई बार कमेटी में एडीसीपी या एएसपी को भी शामिल किया जाता है.

अगर कबाड़ियों की माने तो लोहे के स्क्रेप की कीमत भी 20 रूपए किलो तक है और एक दुपहिया वाहन में करीब 50 किलो वजन होता है.जिसके आसानी से 1500 रूपए से 2000 रूपए तक आसानी से मिल सकते है.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें