जयपुर: 10 फरवरी से शुरू होगा राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र

Smart News Team, Last updated: Sun, 24th Jan 2021, 6:53 PM IST
  • राज्यपाल कलराज मिश्र ने 10 फरवरी से बजट सत्र शुरू करने को लेकर राज्य सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी. उम्मीद की जा रही है कि अभिभाषण में राज्य को वित्तीय संकट से उबारने और लोगों का जीवन पटरी पर लाने के उपायों का जिक्र होगा. 
फाइल फोटो

जयपुर. राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 10 फरवरी से शुरू होगा. राज्यपाल कलराज मिश्र ने बजट सत्र शुरू करने को लेकर राज्य सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बजट सत्र करीब एक माह तक चलने की उम्मीद है. चूंकि वित्त विभाग का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संभाल रहे हैं, ऐसे में वे फरवरी के अंत में प्रदेश सरकार का बजट पेश करेंगे. वित्त विभाग ने बजट बनाने को लेकर कसरत शुरू कर दी है. बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी. उम्मीद की जा रही है कि राज्यपाल के अभिभाषण में राज्य को वित्तीय संकट से उबारने और लोगों का जीवन पटरी पर लाने के उपायों का जिक्र होगा. खासतौर पर कोरोना संकट को लेकर भी जिक्र किया जाएगा. 

बजट से पहले सरकार प्रदेश की आबकारी नीति जारी करेगी. इधर, पिछले चार माह में राजस्थान के चार विधायकों की मौत के बाद राज्य विधानसभा में सभी 200 विधायकों के एक साथ नहीं बैठने को लेकर फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी है. दरअसल, राज्य विधानसभा भवन में पिछले 20 साल से सभी 200 विधायकों के एकसाथ पांच साल नहीं बैठने का संयोग चला आ रहा है. पिछले साल अक्टूबर में कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी, नवंबर में अशोक गहलोत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल व दिसंबर में भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी की बीमारी के कारण मौत हुई. दो दिन पहले कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत का निधन हो गया. इस तरह चार माह में चार विधायकों का निधन हुआ. 200 सदस्यीय विधानसभा में अब विधायकों की संख्या 196 रह गई है. 

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करीब दो साल पहले 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे. उसके बाद दो विधायक हनुमान बेनीवाल व नरेंद्र खीचड़ लोकसभा चुनाव लड़कर संसद में पहुंचे थे. इस कारण उनके विधानसभा क्षेत्रों खींवसर और मंडावा में उप चुनाव हुए थे. इससे पहले पिछली विधानसभा में वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के दौरान भाजपा विधायक धर्मपाल चौधरी, कीर्ति कुमारी व कल्याण सिंह का निधन हुआ तो उप चुनाव कराए गए थे. वहीं, 15वीं विधानसभा में चुनाव प्रक्रिया के दौरान बसपा उम्मीदवार का निधन हो गया था. इस कारण वहां भी आम चुनाव के बाद अलग से चुनाव कराना पड़ा था.

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