राजस्थान विधानसभा के इतिहास में पहली बार सत्ता पक्ष से नाराज होकर विस अध्यक्ष ने सदन को किया अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

Shubham Bajpai, Last updated: Thu, 16th Sep 2021, 10:28 AM IST
  • राजस्थान विधानसभा में सदन के अध्यक्ष सीपी जोशी ने अचानक सत्ता पक्ष को सदन को तीन दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थागित करके सकते में डाल दिया. अध्यक्ष जोशी ने मंत्रियों द्वारा उनके निर्देश न मानने के मामले में यह फैसला लिया. जिसके बाद विधायकों ने अध्यक्ष को काफी मनाने की कोशिश भी की.
राजस्थान विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के इतिहास में पहली बार विधानसभा का सदन विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सत्ता पक्ष के मंत्रियों से नाराज होकर अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है. आज तक सत्तापक्ष के चलते सदन स्थगित नहीं हुआ. सदन में अध्यक्ष जोशी ने यहां तक कह दिया कि आप चाहें तो दूसरा अध्यक्ष चुन लें, लेकिन कार्यवाही गलत तरीके से नहीं चलने दी जाएगी. बता दें कि सदन में चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के मंत्री शांति धारीवाल, रघु शर्मा और परिवहन मंत्री खाचरियावास अध्यक्ष से भिड़ गए थे. जिसके बाद जोशी ने सदन को स्थगित कर दिया.

सदन अनिश्चितकाल स्थगित होने से पहले दो बार हुआ था स्थगित

राजस्थान विधानसभा में राज्य पथ परिवहन सेवा विधेयक 2021 पर चर्चा के बाद जवाब देने खड़े हुए परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और प्रतिपक्ष नेता गुलाबचंद कटारिया भिड़ गए. दोनों की जमकर बहस हुई और इस दौरान भाजपा के विधायक वेल में आकर हंगामा और नारेबाजी करने लगे. जिसके चलते सभापति राजेंद्र पारीक ने दो बार विधानसभा में सदन की कार्यवाही को स्थगित किया.

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अध्यक्ष को मंत्री नहीं कर सकते डिक्टेट

जब सदन दो बार स्थगित होने के बाद फिर से शुरू हुआ तो अगले विधेयक राजस्थान विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पर चर्चा शुरू हुई. इस दौरान संसदीय मंत्री शांति धारीवाल, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और परिवहन मंत्री खाचरियावास स्पीकर से बहस करने लगे. धारीवाल ने कहा कि मंत्रियों को बोलने नहीं दिया जा रहा है ऐसा रहा तो कार्यवाही कैसे चलेगी. जिस पर धारीवाल के साथ दोनों अन्य मंत्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया.

जिस पर स्पीकर ने उन्हें शांत होने को कहा, लेकिन उनके न मानने पर जोशी ने नाराज होते हुए कहा कि आप दूसरा अध्यक्ष चुन लीजिए, आप इस तरह अध्यक्ष को डिक्टेट नहीं कर सकते. ये कहने के बाद उन्होंने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया.

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सदन स्थगित होने से लटके कई विधेयक

अचानक तीन दिन पहले सदन के स्थगित होने से पांच विधेयक लटक गए हैं. जिससे सरकार की परेशान बढ़ गई है. वहीं, सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायकों ने अध्यक्ष को मनाने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम अशोक गहलोत के हस्ताक्षेप के बाद ही इस मामले का कोई हल निकल सकेगा.

 

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