जल विभाग पिला रहा है दूषित पानी, बिना क्लोरीनेशन के ही पेयजल की आपूर्ति

Smart News Team, Last updated: Tue, 29th Sep 2020, 12:10 AM IST
  • जयपुर. राजधानी जयपुर में जलदाय विभाग ही दूषित पानी पिला रहा है. पानी का प्रेशर बढ़ाने के लिए 350 से ज्यादा ट्यूबवेल शहर में खोदे थे. लेकिन अधिकांश में ऑनलाइन क्लोरीनेशन की व्यवस्था नही है.
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: शहर में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करने की जिम्मेदारी जलदाय विभाग की है. लेकिन यही जलदाय विभाग लोगों के घरों में दूषित यानि बेक्टीरिया युक्त पानी सप्लाई करे तो क्या कहा जाए. जलदाय अफसरों ने शहर के कई इलाकों में पानी का प्रेशर बढ़ाने के लिए ट्यूबवेल खोद कर सीधे पेयजल सप्लाई लाइन से जोड़ दिया गया है. लेकिन इन ट्यूबवेल पर आॅनलाइन क्लोरीनेशन जैसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसे में अब विभाग के अधिकारी ही कह रहे हैं कि इस स्थिति में ट्यूबवेल के पानी मे बेक्टीरिया आसानी से पनप सकते हैं और लोगों को जल जनित बीमारियों से पीड़ित कर सकते हैं. जबकि पहले खोदे गए सभी ट्यूबवेल में आॅनलाइन क्लोरीनेशन की व्यवस्था है और पानी में किसी भी तरह के बेक्टीरिया के होने की संभावना न के बराबर होती है.

350 से ज्यादा खोदे थे टयूबवैल,अधिकांश बिना क्लोरीनेशन के

शहर में भीषण गर्मी का दौर चला तो विभाग की ओर से पेयजल सप्लाई के लिए कंटीजेंसी प्लान बनाया गया. इस प्लान के तहत 350 से ज्यादा ट्यूबवेल उन इलाकों में खोदे गए जहां अंतिम छोर पर पानी का प्रेशर कम था. इन ट्यूबवेल को सीधे ही सप्लाई लाइन में जोड़ दिया गया. जबकि पुराने खुदे हुए ट्यूबवेल की तरह इन सभी में भी ऑनलाइन क्लोरीनेशन की व्यवस्था होनी थी जिससे लोगों की सेहत को भी सुरक्षित रखा जा सके.

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महज 30 से 35 हजार के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड

जलदाय अफसरों की माने तो ऑनलाइन क्लोरीनेशन में कोई बड़ा खर्चा नहीं आता है. महज 30 से 35 हजार में यह व्यवस्था हो जाती है. अब चिंता की बात वहां ज्यादा है जहां ट्यूबवेल किसी नाले के पास खोदे गए. क्योंकि वहां के पानी में बैक्टीरिया के आने की संभावना ज्यादा हो सकती है.

पानी नहीं आता पीने के काम

जलदाय विभाग के अफसरों ने का तर्क है कि ट्यूबवेल का पानी पीने के काम नहीं आता है. क्योंकि अधिकांश शहर में बीसलपुर से पेयजल की सप्लाई है. इस पानी को बर्तन साफ करने और कपड़े धोने में काम में लिया जाता है.

 

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