दूर्वा अष्टमी के दिन दूब घास की पूजा करने से होंगी मनोकामनाएं पूरी, जानें डेट, मुहूर्त और विधि

Anuradha Raj, Last updated: Sun, 12th Sep 2021, 1:49 PM IST
  • दूर्वा अष्टमी का हिंदू धर्म में बहुत ही ज्यादा महत्व होता है. ऐसे में जो महिलाएं इस दिन विधि-विधान से व्रत रख दूर्वा की पूजा करती हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है.
दूर्वा अष्टमी 2021

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दूर्वा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. परंपरा के अनुसार इस दिन दूर्वा घास की पूजा की जाती है. मान्यता ऐसी है कि दूर्वा अष्टमी के दिन अगर दूर्वा की पूजा की जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. इतना ही नहीं ऐसा करने से कुल और परिवार में वृद्धि भी होती है. दूर्वा अष्टमी का पर्व साल 2021 में 13 सितंबर को मनाया जाएगा.

ये है दूर्वा अष्टमी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं में ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु कूर्म अवतार धारण करके समुद्र मन्थन के दौरान मन्दराचल पर्वत की धुरी नें विराजमान हो गए थे. भगवान विष्णु की जंघा से मन्दराचल पर्वत की तीव्र गति से धूमने के कारण उसकी रगड़ा से कुछ रोम निकलकर समुद्र में गिर गए. भगवान विष्णु के रोम अमृत के प्रभाव से पृथ्वीलोक पर दूर्वा घास के रूप में उत्पन्न हो गए. इसलिए दूर्वा को बेहद ही पवित्र माना जाता है, और दूर्वा घास की दुर्वाष्टमी के दिन पूजा की जाती है.

ये है दूर्वा अष्टमी की पूजा का समय

13 सितम्बर 2021, दूर्वा अष्मटमी सोमवार

13 सितंबर 2021 को 3 बजकर 10 मिनट से अष्टमी तिथि प्रारम्भ होगा

14 सितम्मबर 2021 को 1 बजकर 9 मिनट पर अष्टमी तिथि समाप्त हो जाएगी.

ये है दूर्वा अष्टमी की व्रत विधि

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि कर लें, उसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें. उसके बाद व्रत का संकल्प लें, और देवताओं पर फल-फूल, चावल, धूपबत्ती, दही और अन्य पूजा की सामग्री अर्पित करें. इतना ही नहीं बल्कि गणेश और शिव जो दूर्वा अष्टमी के पालकर्ता हैं उनकी विधि-विधान से पूजा करें, और गणपति को दूर्वा अर्पित करना ना भूलें. ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखती हैं, उनतके घर में खुशियां आती हैं. साथ ही भगवान गणेश को तिल और मीठे आटे से बनी रोटी का भगवान गणेश को भोग लगाया जाता है. उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं, और वस्त्र दान करें.

 

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