राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस पर वेबिनार, बिजली बचाने और पानी के महत्व पर चर्चा

Smart News Team, Last updated: 16/12/2020 05:53 PM IST
  • राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस पर वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें देशभर से 1337 इंजीनियरिंग के छात्रों ने भाग लिया था. पावर टू कंजर्व अवार्ड 2020 क्विज पैनलिस्ट में सीनियर ब्यूरोक्रेट्स के साथ उर्जा और पब्लिक पॉलिसी के विशेषज्ञ भी शामिल हुए थे. 
राष्ट्रीय उर्जा दिवस पर वेबिनार का आयोजन

राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस के मौके पर देशभर के इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए क्विज का आयोजन किया जाता है जिसमें आठ राउंड होते हैं. इस साल पावर टू कंजर्व अवार्ड 2020 क्विज प्रतियोगिता में लगभग 1337 छात्रों ने भाग लिया है. भारत के आर्थिक सुधारों का समर्थन करते हुए कोविड 19 के समय पावर टू कंजर्व एनर्जी एफिशिएंसी विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया था जिसमें डिजायक एनर्जी के प्राइमस पार्टनर्स का सहयोग भी मिला था. पैनलिस्टों में सीनियर ब्यूरोक्रेट, उर्जा और पब्लिक पॉलिसी के विशेज्ञ शामिल थे.

ग्राम विकास और पंचायती राज विभाग के एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी रोहित कुमार सिंह का कहना था, "हमें 'अर्थव्यवस्थाओं के दायरे' पर काम करने की ज़रूरत है यानी सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय और प्रभावी ढंग से कन्वर्जेंस लाने की ज़रूरत है. काम इस तरह करना है कि मैजिक पिट जैसे ढांचों के ज़रिए गंदले पानी को स्रोत के सबसे करीब ही निपटाया जाए. यह पानी के संरक्षण और रीसाइक्लिंग का अच्छा तरीका होगा. हमें अक्षय ऊर्जा के विकेंद्रीकृत मॉडल को आगे बढ़ाना है, जैसे सभी अस्पतालों और फ़ील्ड कार्यालयों को सौर ऊर्जा चालित बनाना. इसी तरह, ग्रीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढ़ाने और प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है। इन सब कामों के ज़रिए स्थिरता और संरक्षण सुनिश्चित होगी.''

पानी मानवजाति के ज़िंदा रहने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है और इसका ठीक से इस्तेमाल करने की ज़रूरत है.

आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर शांतनु चौधरी ने कहा, "रिसाव न केवल पानी को बर्बाद करते हैं बल्कि इसे दूषित भी करते हैं. राजस्थान में जल प्रदूषण बहुत बड़ी चुनौती है. ज़रूरत होने पर पाइपलाइनों की निगरानी और मरम्मत की जानी चाहिए. पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का एक बड़ा मौक़ा है. हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों को पीने योग्य साफ़ पानी मिले.'' 

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पानी के संरक्षण की तुरंत ज़रूरत है और किसी भी रिसाव को रोकने के लिए पाइपलाइनों की निगरानी होनी चाहिए. राजस्थान में पुराने जमाने की बावड़ियां हैं, जो बारिश के दौरान इकट्ठा पानी को संरक्षित करने का एक बेहतरीन तरीका था. सेफ़ वाटर नेटवर्क के कंट्री डायरेक्टर रविंद्र सेवक के मुताबिक़, "हर घर में पीने योग्य पानी (मीठे पानी) के भंडारण के लिए एक टंकी और सफ़ाई-धुलाई, बागवानी के पानी के लिए दूसरी टंकी होने से राजस्थान में पानी की कमी से निपटा जा सकेगा और वर्षा जल इकट्ठा करने वाले कुंड या टैंकों में पानी बढ़ेगा.

जल जीवन मिशन के तहत बने हर ओवरहेड टैंक या दूरदराज की ढाणियों में स्थापित विकेंद्रीकृत जल उपचार संयंत्रों से पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए रिमोट मॉनीटरिंग, पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना ज़रूरी है."

अगर हम अपने मौजूदा बुनियादी ढांचे को बचाए और बनाए रख सकते हैं तो यह पानी और बिजली की निर्बाध आपूर्ति को जारी रखने में मदद करेगा. 

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डिज़ायर एनर्जी के संस्थापक और प्रबंध निदेशक गौरव कुमार गुप्ता ने कहा, "पहले से मौजूद तरीक़ों से तुरंत ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता है क्योंकि ऐसा करने पर हमें बिजली पैदा करने के लिए और परियोजनाएं लगाने की ज़रूरत नहीं होगी. भारत में नगर निकाय घरेलू जल संचरण और वितरण के लिए 12.45 बिलियन किलोवॉट घंटे ऊर्जा की खपत करते हैं. यदि ईएससीओ परियोजनाओं के ज़रिए ऊर्जा संरक्षण उपाय लागू किए जाएं, तो हम लगभग 30 प्रतिशत ऊर्जा बचा सकते हैं. इसके अलावा इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स से सक्षम निगरानी के ज़रिए जनता को भरोसेमंद ढंग से जल आपूर्ति भी की जा सकेगी. राजस्थान जैसे राज्यों के दूरदराज के ग्रामीण इलाक़ों में सौर ऊर्जा आधारित विकेंद्रीकृत जल आपूर्ति सिस्टम से जल जीवन मिशन के उद्देश्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किए जा सकते हैं."

नए भंडारों की पहचान से ज़्यादा पानी मिल पाता है और आपूर्ति भी सुधर सकती है. केयर्न ऑयल एंड गैस, वेदांत लिमिटेड के स्टेट कोऑर्डिनेटर शाश्वत कुलश्रेष्ठ ने कहा, "तेल और गैस उद्योग का हिस्सा होने के नाते, लगातार ड्रिलिंग और अन्वेषण से हमें भूजल भंडार की पहचान करने में मदद मिली है. बाड़मेर में हमें भूजल भंडार मिले हैं. 

पानी खारा होने के बावजूद हम इसे औद्योगिक कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं. हमने बाड़मेर के लगभग सभी ज़िलों में आरओ लगाए हैं और 5 रुपये में 20 लीटर पानी दे रहे हैं. हालांकि, ग्रामीणों तक इसे पहुँचाना समस्या है और एकमात्र समाधान पानी की पाइप लाइन है. हमारा अन्वेषण बाड़मेर से परे है और हमारा भू-वैज्ञानिक डेटा पानी के और भंडारों की पहचान करेगा.''

पानी और ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ा योगदान उनके रखरखाव और चलाने वाले आधारभूत ढांचे का होता है. जैसे-जैसे नीति निर्माता कोविड-19 महामारी के साथ जूझ रहे हैं, उसी के साथ ऊर्जा दक्षता के संरक्षण के तरीकों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है जो रहन-सहन की स्थितियों में सुधार करेंगे और ऊर्जा संक्रमण को मजबूत करेंगे. 

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वेबिनार का उद्देश्य अवसरों, चुनौतियों और समाधानों की समझ को गहरा करना था.

गौरव कुमार गुप्ता ने आगे कहा, "इसी के मद्देनज़र हम विभिन्न परियोजनाओं और उत्पादों के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं. हम विभिन्न ईएससीओ परियोजनाओं और अच्छे एलईडी और सौर उपकरणों के माध्यम से सालाना 25 मिलियन यूनिट बिजली बचा रहे हैं."

ऊर्जा संरक्षण की आदतों और बिजली के सही इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 2001 में भारत सरकार ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम बनाया था और 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के रूप में घोषित किया गया है.

डिज़ायर एनर्जी के बारे में

डिज़ायर ग्रुप आईएसओ 9001: 2008 और आईएसओ 14000: 2015 प्रमाणित कंपनी है. 1982 में एक प्रोप्राइटरशिप फ़र्म के रूप में शुरू हुई यह कंपनी 2011 में प्राइवेट लिमिटेड बनी. इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, वाटर इन्फ्रा ऑटोमेशन, पानी के बुनियादी ढांचे और वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सेवाएं प्रदान करके राष्ट्र की सेवा करना है.

कंपनी ईएससीओ प्रोजेक्ट्स, सोलर पंप, सोलर रूफ़टॉप प्रोजेक्ट्स, रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम, स्काडा और ऑटोमेशन, वाटर इंफ्रा टर्न-की प्रोजेक्ट्स, समुदाय आधारित रिवर्स ऑस्मोसिस प्लांट्स, डी-फ्लोरिडिएशन प्रोजेक्ट्स आदि में काम कर रही है. कंपनी की मौजूदगी देशभर में है और अपने चैनल पार्टनर नेटवर्क के ज़रिए वह दुनिया भर में विस्तार कर रही है. 

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ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (भारत सरकार) द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता और संरक्षण तकनीकों को लागू करने से 75.4 बिलियन किलोवॉट घंटा बिजली की बचत होती है, जो 73.1 बिलियन किलोवॉट घंटा के समग्र ऊर्जा घाटे से अधिक है.

डिज़ायर एनर्जी सॉल्यूशंस के सहयोगी प्राइमस पार्टनर्स के सह-संस्थापक निलय वर्मा ने बताया, “पिछले एक दशक में, ऊर्जा बचत समाधान देने को समर्पित हमारी जैसी कंपनियों ने लोगों को जल संकट देखने का तरीक़ा बदल दिया है. अब हम हर घर, गांव और समुदाय तक ताज़ा और साफ़ पानी पहुंचाने की स्थिति में हैं. अभी भी बहुत कुछ किया जाना है, लेकिन हमें उम्मीद है कि सरकार की मदद से हम जल्द ही अपने लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे.''

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