जयपुर: हाईकोर्ट ने दवा की कालाबाजारी करने वाले एमबीबीएस छात्र की याचिका की खारिज

Smart News Team, Last updated: Sat, 15th May 2021, 9:47 AM IST
  • कोरोना महामारी में जीवनदायी बताए जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के कई मामले सामने आए है. ऐसे ही एक मामले में जब आरोपी जमानत के लिए हाईकोर्ट के जयपुर बेंच के समक्ष पहुंचा तो कोर्ट ने जमानत याचिका तल्ख टिप्पणी के साथ खारिज कर दी.
प्रतिकात्मक तस्वीर 

जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने कोरोना मरीजों को दिए जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले एमबीबीएस छात्र विकास मित्तल को जमानत देने से इनकार कर दिया है. यह मामला जयपुर बेंच के समक्ष था . अदालत ने कहा है कि पूरा देश आज कोविड महामारी से गुजर रहा है और मरीजों को दवा की सख्त आवश्यकता है. ऐसे में दवा की कालाबाजारी करने वाले को राहत नहीं दी जा सकती है. याचिकाकर्ता एमबीबीएस छात्र ने याचिका में कहा कि पुलिस ने उसे जबरन फंसाया है. इसके अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लगाए आरोप जमानतीय अपराध की श्रेणी में आते हैं. वहीं, औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम की धाराएं लागू नहीं होती है.

 

याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों का पूरी तरह विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि रेमडेसिविर जीवनदायी दवा के तौर पर काम में ली जा रही है. लेकिन आरोपी ने एमबीबीएस करते हुए इसकी कालाबाजारी की है.  इस पर न्यायाधीश नरेंद्र सिंह ढढ्ढा ने जमानत याचिका को खारिज कर जमानत देने से मना कर दिया .

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पुलिस कर रही कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई .बता दें कि राजस्थान में लगातार जीवनदायी रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले सामने आ रहे है. पुलिस और एसीबी ऐसे लोगों पर अपनी नजर रखे हुए है. अब तक कई आरोपियों को कालाबाजारी के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. बता दें कि कुछ दिन पहले जयपुर में एक सरकारी डॉक्टर भी अपने दो दलालों के साथ इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए गिरफ्तार हुआ था.

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