जयपुर:तीन बार कोरोना पॉजिटिव हुई डॉक्टर, फिर भी रोजाना देखती हैं 300 मरीज

Smart News Team, Last updated: Tue, 11th May 2021, 6:00 PM IST
  • आज डॉक्टर्स और अस्पताकर्मी 24 घंटे अस्पतालों में काम कर रहे हैं. जयपुर में कई डॉक्टर्स और कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्होंने इस महामारी में अपनों को खो दिया. लेकिन, आज भी वे इस महामारी से लोगों को बचाने में लगे हैं . आज आपको  बताएंगे जयपुर की डॉक्टर वंदना और लैब असिस्टेंट अमित के बारे में.
प्रतिकात्मक तस्वीर 

जयपुर. शहर में कुछ ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनसे डॉक्टर्स का मनोबल टूट रहा है. कहीं कोई डॉक्टर तो कहीं कोई नर्सिंग स्टाफ रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़ा जा रहा है. इतना ही नहीं कोविड मरीज से बेड के लिए दो लाख रुपए तक की रिश्वत मांगी जा रही है. ऐसी घटनाएं होने के बाद उन चिकित्साकर्मियों को जरूर ठेस पहुंचती है जो दिन—रात लोगों की सेवा कर रहे है. लेकिन, ये सिक्के का केवल एक पहलू है.​ सिक्के के दूसरी तरह जो दिखाई देता है वो अपने आप में बेह​द खास है. जी हां, आज हम आपको कुछ ऐसे कोरोना वॉरियर्स के बारे में बताएंगे, जिन्होंने इस कोरोना महामारी में अपनो को खो दिया. कई की जान पर बन आई. खुद कई बार पॉजिटिव हुए. लेकिन, फिर भी आज तक वे इस महामारी में लोगों की सेवा करने में डटे हुए हैं. कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी तरह मरीजों को राहत मिले.

जी हां, सबसे पहले हम आपको बताते हैं जयपुर के मानसरोवर में स्थित यूपीएचसी किरण पथ चिकित्सालय में कार्यरत डॉ वन्दना गुप्ता के बारे में. एक साल पहले जब यह महामारी शुरू हुई, तब से वे लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं. रोजाना करीब 250 से 350 मरीजों को ओपीडी में देख रही हैं. इनमें कोरोना के संदिग्ध मरीज भी शामिल हैं. डॉक्टर वन्दना बताती है कि उनके चिकित्सालय में दो महीने से कोविड का वैक्सीनेशन हो रहा है और छह महीने से कोविड सैंपलिंग का काम किया जा रहा हैं. कोविड पॉजिटिव मरीजों को घर—घर जाकर चिकित्सा सेवा दी जा रही है. डॉ. वंदना बताती है कि एक साल में वह खुद तीन बार पॉजिटिव हो चुकी है. इतना ही नहीं, उनके कारण परिवार के 15 सदस्य भी कोविड पॉजिटिव हो गए थे. उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से वह अपने ससुर को खो चुकी हैं. इसके बाद भी उन्होने हिम्मत नहीं हारी और पूरी निष्ठा से काम कर रही हैं. बड़ी बात यह है कि डॉक्टर वंदना पिछले माह भी कोरोना पॉजिटिव हुई थी. लेकिन, कोरोना महामारी के कारण उन्होंने आराम करने की बजाय लोगों को आराम देने की सोची और जैसे ही वे स्वस्थय  हुई, उन्होंने अस्पताल ज्वाइन कर लिया.

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वहीं, दूसरी ओर कोरोना में पिता को खोने वाले लैब असिस्टेंट अमित गुप्ता पिछले छह महीनों से लगातार संदिग्ध मरीजों के कोरोना सैंपल ले रहे हैं. इसके लिए अमित का पूरा परिवार और खुद वह भी कोरोना पॉजिटिव हो गए. परिवार में बुजुर्ग माता—पिता, पत्नी और 12 साल का बच्चा भी कोरोना से नहीं बच पाया. कोरोना की वजह से पिता को भी खोना पड़ा. पिता की मौत के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने काम में वापस जुट गए. अपने कार्य के कारण संक्रमण फैलने के डर से उन्हें अपनी बुजुर्ग मां को  दूर करना पड़ा और उन्हें  अपने भाई के पास हैदराबाद भिजवा दिया, ताकि उन्हें कोई संक्रमण नहीं हो. कोरोना सैंपल लेने के साथ साथ वह लैब में होने वाली सभी जांच करते हैं. मरीजों को समझाते है कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है. बस सावधानी पूरी तरह से बरते और कोविड गाइड लाइन्स  का  पालन करें. अमित कहते हैं कि संदिग्ध मरीजों के बीच में रहने के कारण घर में अपना कमरा अलग बना रखा है. जिसके कारण फिर से घर वालों को संक्रमण का शिकार नहीं होना पड़े.

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