जयपुर: एकल पीठ के आदेश को अभिभावकों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

Smart News Team, Last updated: Wed, 23rd Sep 2020, 9:33 AM IST
  • अभिभावकों ने स्कूल फीस वसूली आदेश के खिलाफ खंडपीठ में दायर की अपील. 
  • एकलपीठ के ट्यूशन फीस की 70 फीसदी राशि वसूलने के आदेश को दी चुनौती.
 राजस्थान उच्च न्यालय

जयपुर। अभिभावक समिति ने मंगलवार को एकल खंडपीठ द्वारा दिए गए निर्देश को चुनौती दे दी है. कोरोना संक्रमण काल में अभिभावकों से निजी विद्यालयों द्वारा वसूले जा रहे फीस को लेकर पहले भी याचिका दायर की जा चुकी थी, जिसके बाद एकल खंडपीठ ने विद्यालयों को 70 फ़ीसदी ट्यूशन फीस वसूले जाने का निर्देश दे दिया था.

एकल खण्डपीठ के निर्देश के बाद अभिभावकों ने इसे चुनौती दे दी है. जल्द ही इस पर सुनवाई शुरू होगी. अभिभावकों ने स्कूल फीस वसूली आदेश के खिलाफ खंडपीठ में अपील दायर कर दी है. आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा निजी स्कूलों की फीस वसूली मामले में दिए आदेश को अभिभावकों ने खंडपीठ में अपील के जरिए चुनौती दी है.

आल राजस्थान पेरेन्ट्स फोरम की ओर से दायर अपील में कहा है कि निजी स्कूल एकलपीठ के आदेश का हवाला देकर फीस जमा करवाने के लिए अभिभावकों पर अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं. एकलपीठ का आदेश जनहित के खिलाफ है, क्योंकि कोरोना संक्रमण काल में स्कूल ही संचालित नहीं हुए हैं. निजी स्कूल संचालक एकलपीठ के आदेश की आड़ में और उसकी गलत व्याख्या करते हुए अभिभावकों से जबरन फीस वसूली कर रहे हैं.

अपील पर जल्द सुनवाई हो सकती है

अपील पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। दरअसल, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 7 सितंबर को सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस इन राजस्थान व प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर अंतरिम आदेश दिया था.

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इस आदेश के अनुसार एकलपीठ ने निजी स्कूलों को कुल ट्यूशन फीस की 70 फीसदी राशि अभिभावकों से तीन किश्तों में वसूलने की छूट दी थी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि फीस नहीं देने पर केवल बच्चों को ऑनलाइन क्लासों में शामिल नहीं किया जा सकता, लेकिन फीस नहीं देने पर किसी बच्चे का नाम स्कूल से नहीं काटा जाए.

निजी विद्यालय हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की गलत व्याख्या करते हुए जबरन फीस वसूल रहे हैं. फीस जमा किए जाने को लेकर किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा रही है. निजी विद्यालय मनमाना रवैया अपना रहे हैं.

 

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