जयपुर: साठ हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति पर आरपीएससी ने लगाया ब्रेक

Smart News Team, Last updated: 04/10/2020 02:56 PM IST
  • प्रदेश के 60 हजार शिक्षकों की पदोन्नति की विसंगति को लेकर पिछले दो साल से मामला गूंज रहा था. इसके बाद शिक्षा राज्य मंत्री ने विसंगति दूर करने के लिए समीक्षा कराई थी.
राजस्थान लोक सेवा आयोग

जयपुर। प्रदेश के 60 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति के अरमानों पर राजस्थान लोक सेवा आयोग प्रशासन ने ब्रेक लगा दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद भी आयोग प्रशासन ने बैठक नहीं बुलाई है. इससे पदोन्नति की राह अटकी हुई है. पदोन्नति की विसंगति को लेकर दो साल से मामला गूंज रहा था.

मामले के लटके होने के चलते प्रदेश के शिक्षकों में इसे लेकर आक्रोश है. शिक्षकों ने लंबित चल रहे मामले को जल्द निपटाया जाने की अपील की है जिससे कि पदोन्नत का रास्ता साफ हो सके. दो वर्ष से लंबित चल रहे इस मामले को लेकर शिक्षकों में आक्रोश है. शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द ही मामले का निपटारा नहीं किया गया तो शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी.आपको बता दें कि प्रदेश के 60 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति के अरमानों पर राजस्थान लोक सेवा आयोग प्रशासन ने ब्रेक लगा दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद भी आयोग प्रशासन ने बैठक नहीं बुला रहा है.

इससे पदोन्नति की राह अटकी हुई है. दरअसल पदोन्नति की विसंगति को लेकर पिछले दो साल से मामला गूंज रहा था. इसके बाद शिक्षा राज्य मंत्री ने विसंगति दूर करने के लिए समीक्षा कराई थी. इस दौरान व्याख्याता व प्रधानाध्यापक के प्रधानाचार्य पद पद पदोन्नति के लिए 80:20 का अनुपात लगभग तय कर लिया लेकिन लोक सेवा प्रशासन के अनुमोदन की वजह से मामला अटका हुआ है. लोक सेवा आयोग की देरी की वजह से प्रदेश के व्याख्याता व प्रधानाध्यापकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

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मुख्यमंत्री कार्यालय में मई में हुई थी बैठक

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा की शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर आठ मई को बैठक हुई थी. इस बैठक में प्राध्यापक व प्रधानाध्यापक पदोन्नति को लेकर चर्चा हुई. इस बैठक में मुख्यमंत्री ने पदोन्नति नियमों को तर्कसंगत बनाने की बात कही थी. इसके बाद शिक्षा राज्य मंत्री ने नए नियमों का संकेत देते हुए ट्वीट भी किया था.

80:20 पर मुहर लगने की आस

पदोन्नति के मामले को लेकर भादरा विधायक बलवान पूनियां ने शिक्षा विभाग ग्रुप दो को पत्र लिखा था. विधायक को संयुक्त शासन सचिव राजेश वर्मा की ओर से लिखे पत्र में बताया कि पहले 33 प्रतिशत प्रधानाध्यापक व 67 प्रतिशत प्राध्यापक स्कूल शिक्षा को प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नत किया जाता था.

फिलहाल प्रधानाध्यापक का कैडर स्ट्रेंथ 3650 है जबकि प्राध्यापकों की संख्या लगभग 52 हजार 699 है. इस हिसाब से इनका अनुपात 7: 93 प्रतिशत होता है. ऐसे में पुराने नियम अब व्यावहारिक प्रतीत नहीं होते है. संयुक्त शासन सचिव की ओर से लिखे पत्र में बताया कि अब 80:20 प्रतिशत का अनुपात करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है.

प्रधानाध्यापक बोले, नए नियमों से युवाओं को नुकसान

प्रधानाध्यापकों का तर्क है कि नए नियमों से व्याख्याता के पद से प्रधानाध्यापक के पद पर जाने वाले 350 से अधिक युवाओं को काफी नुकसान होगा. शिक्षा सेवा परिषद का कहना है कि प्रधानाध्यापक सीधी भर्ती के जरिए शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा पद है. ऐसे में सरकार को फिर से रिव्यू भी करना चाहिए. इधर, व्याखताओं का कहना है कि वर्तमान संख्या के हिसाब से पदोन्नति का जो अनुपात तय किया है वह सही है.

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा

मुख्य सचिव के जरिए राजस्थान लोक सेवा आयोग को सरकार की मंशा से अवगत कराया जाएगा.सरकार ने पदोन्नति की विसंगतियों को दूर कर दिया है.जल्द इस मामले में प्रदेश के व्याख्याता व प्रधानाध्यापकों को राहत दिलाई जाएगी.

गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्य मंत्री

सरकार के प्रस्तावित नए नियमों से प्रधानाध्यापकों का पदोन्नति का एक तरह से रास्ता बंद हो जाएगा. इससे विभाग के उच्च पद रिक्त रहने की संभावना बनेगी. रेसा नए पदोन्नति अनुपात का विरोध करता है.

कृष्ण कुमार गोदारा, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद

 

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