जयपुर: देश में गिरते जीडीपी को लेकर सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Smart News Team, Last updated: 02/09/2020 09:56 PM IST
  • जयपुर में राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने वित्तीय वर्ष 2020-21 की प्रथम तिमाही में जीडीपी में हुई ऋणात्मक वृद्धि पर केंद्र सरकार पर साधा निशाना. सचिन पायलट ने इसके लिए केन्द्र सरकार की दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों एवं वित्तीय कुप्रबंधन को ठहराया जिम्मेदार.
सचिन पायलट की फाइल फोटो 

जयपुर में राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने वित्तीय वर्ष 2020-21 की प्रथम तिमाही में जीडीपी में हुई ऋणात्मक वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त किया है. सचिन पायलट ने इसके लिए केन्द्र सरकार की दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों एवं वित्तीय कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया हैं. पायलट ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है जो कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही चिंताजनक है. इसको लेकर हम सभी बहुत चिंतित हैं.

पायलट ने बताया कि माइनिंग सेक्टर में 23.3 प्रतिशत, ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, होटल में 47 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग में 39.3 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 50.3 प्रतिशत तथा उत्पादन सेक्टर में 20.5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 वर्षों में जीडीपी की यह सबसे बड़ी गिरावट है. विश्व की प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्था से अगर तुलना किया जाए तो भारत में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल सर्विस तथा यूटिलिटी सेक्टर में क्रमशः 5.3 व 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जिसे उपरोक्त की तुलना में संतोषजनक कहा जा सकता है. सचिन पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा बिना किसी तैयारी के लॉकडाउन का फैसला लिया गया, जिसका सीधा असर असंगठित क्षेत्रों पर पड़ा है और आर्थिक गतिविधियां एकदम ठप्प हो गई तथा सरकार की आर्थिक नीतियों का लाभ जनता को नहीं मिल पाया. जिसके चलते जीडीपी में इतनी भारी ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है.

उन्होंने कहा कि जीडीपी के आंकड़ों से साबित हो गया है कि देश की अर्थव्यवस्था ऐसे दौर में पहुंच गई है जिसका बहुत बुरा प्रभाव आगामी समय में मजदूर, किसान, नौजवान सहित आम आदमी पर पड़ने वाला है. केन्द्र सरकार को शीघ्र ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. अन्यथा देश के सामने भारी अर्थव्यवस्था की संकट दिख रहा है.

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