Lohri 2022: जानें कब है लोहड़ी और पर्व से जुड़ी ये 5 परंपराएं और मान्यताएं

Pallawi Kumari, Last updated: Sun, 9th Jan 2022, 11:12 AM IST
  • लोहड़ी की धूम देशभर में देखने को मिलती है. लेकिन खासकर पंजाब और हरियाणा में यह पर्व मनाया जाता है. इस बार लोहड़ी 13 जनवरी 2022 की शाम मनाई जाएगी. आइये जानते हैं लोहड़ी पर्व से जुड़ी ये 5 खास मान्यताएं और परंपराएं.
लोहड़ी की परंपराएं और मान्यताएं

लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप में सिख धर्म के लोगों से जुड़ा हुआ है. लेकिन हिंदू धर्म के लोग भी धूमधाम के साथ लोहड़ी मनाते हैं. अलग-अलग जगहों में इसे कई अलग नामों से भी जाना जाता है. लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था. जोकि तिल और रोड़ी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों के मेल से जुड़ा है. लेकिन अब ये लोहड़ी के नाम में फेमस हो गया है. पंजाब के कई इलाकों मे इसे लोही या लोई भी कहते हैं. हर साल की तरह इस साल भी लोहड़ी का त्योहार गुरुवार 13 जनवरी को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा. आइये दानते हैं क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार और जानते हैं इस पर्व से जुड़ी परंपराएं और मान्ताएं.

कब मनाते हैं लोहड़ी- भारत में साल में पडने वाली सभी ऋतुओं जैसे पतझड़, सावन और बसंत में कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं. इस तरह लोहड़ी का त्योहार भी बसंत ऋतु के आगमन के साथ 13 जनवरी, पौष के आखिरी महीने में मनाया जाता है.

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पौराणिक मान्यता- लोहड़ी पर्व से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार सती के त्याग के रूप में भी इसे मनाया जाता है. कहा जाता है कि प्रजापति दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर शिव की पत्नी सती ने आत्मदाह कर लिया था तो उनकी याद में यह पर्व मनाया जाता है.

किसान और फसल से जुड़ा है पर्व- लोहड़ी पर्व का संबंध किसान की फसल से और ऋतु के मौसम से हैं. लोहड़ी की पवित्र अग्नि में किसान अपनी फसल की पहली कटाई डालते हैं और उन्नति की कामना करते हैं. इस दिन मूली और गन्ने की फसल बोई जाती है. इस मौसम में खेतों में सरसों के फूल लहराते हैं.

बनाए जाते हैं खास पकवान- लोहडी के दिन गजक, रेवड़ी, मूंगफली, ति-गुड़ के लड्डू, मक्के की रोड़ी और सरसों का साग खास पकवान के रूप में बनाए जाते हैं. ये पकवान लोहड़ी के दिन खाने और पकाने की परंपरा सालों से चली आ रही है.

आधुनिक रूप में लोहड़ी- समय के साथ साथ हर चीज का रूप बदल जाता है. ठीक उसी तरह लोहड़ी पर्व मनाने का आधुनिक दौर में बदल गया है. अब पारंपरिक पोशाक और पकवानों की जगह आधुनिक पहनावे और पकवानों को शामिल कर लिया गया है. बाजार में कई तरह के पकवान अब मिलने लगे हैं. लोग घर पर कम ही पकवान बनाते हैं इसके बजाय बाजार से बने बनाए पकवान लाए जाते हैं. लोक गीत की जगह जब डीजे और बड़े बड़े स्पीकर लगाकर सभी लोहड़ी पर नाचते हैं.

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