Makar Sankranti 2022: खिचड़ी के बिना अधूरा है मकर संक्रांति पर्व, जानें इसका महत्व

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 5th Jan 2022, 9:48 AM IST
  • मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और पकाने का खास महत्व है. इस दिन कई व्यजंन बनते हैं लेकिन चावल और उड़द दाल की खिचड़ी के बिना मकर संक्रांति का पर्व अधूरा माना जाता है. कई जगहों पर इसे खिचड़ी पर्व कहा जाता है.
मकर संक्रांंति पर खिचड़ी का महत्व

देशभर में मकर संक्रांति की धूम देखने को मिलती है. हर साल 14 जनवरी के दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. सुबह उठकर स्नान दान कर मकर संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना की जाती है.इस दिन वैसे तो घर पर ढ़ेरों पकवान बनते हैं. लेकिन खिचड़ी इस खासतौर पर बनाई जाती है और इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है. मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और बनाने को काफी शुभ माना जाता है. खिचड़ी में चावल के साथ उड़द की दाल और तिल के कुछ दाने जरूर डाले जाते हैं.

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व-

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा सालों से चली आ रही है. इसके पीछे एक कहानी है, जिसके अनुसार कहा जाता है कि जब मुगल बादशाह खिलजी के आक्रमण के दौरान नाथ योगियों के पास खाने के लिए कुछ नहीं था. तब बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और कुछ हरी सब्जियां एक साथ पकाने की सलाह दी थी. इसके बाद से खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा शुरू हो गई. 

नवविवाहित जोड़े के लिए क्यों खास होती है पहली लोहड़ी, शिव-पार्वती की कथा से जुड़ी है परंपरा

इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने के बाद सबसे पहले इसे भोग के रूप में चढ़ाया जाता है. इस दिन बाबा गोरखनाथ मंदिर में भी खिचड़ी का भोग चढ़ाया जाता है. खिचड़ी सिर्फ मकर संक्रांति ही नहीं बल्कि कई पूजा पाठ के बाद भोग के रूप में भी बांटा जाता है. लेकिन मकर संक्रांति पर बनने वाली खिचड़ी में उड़द दान का गोना जरूरी होता है.

एक मान्यता यह भी है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से राशि में ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है. क्योंकि चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है, उड़द दाल को शनि का और हरी सब्जियों का संबंध बुध से होता है.

Vinayak Chaturthi 2022: वरद चतुर्थी पर करें इन मंत्र का जाप, मिलेगी श्री गणेश की कृपा

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें