28 हजार छात्रों वाले राजस्थान विश्वविद्यालय में मात्र चार प्रोफेसर

Smart News Team, Last updated: 15/12/2020 01:00 PM IST
  • शिक्षकों की कमी के कारण एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप 200 में भी नहीं बना पाया स्थान. आठ साल से अटकें है शिक्षकों के प्रमोशन. करीब एक साल पहले उच्च शिक्षा विभाग और राजभवन ने विश्वविद्यालय को 272 शिक्षकों के प्रमोशन की स्वीकृति दे दी थी.
राजस्थान विश्वविद्यालय

जयपुर. प्रदेश का सबसे बड़ा राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है. राजस्थान विश्वविद्यालय के 30 से अधिक विभागों व इसके संघटक महाविद्यालयों में 28 हजार छात्र हैं, जबकि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के सेवानिवृत्त होते ने अब मात्र चार प्रोफेसर ही बचे हैं. प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों एवं असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी के कारण विश्वविद्यालय एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप 200 में भी अपना स्थान नहीं बना सका है. 

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय शिक्षकों के प्रमोशन व स्थायीकरण से इसलिए बचना चाह रहा है कि उसके ऐसा करते ही विवि के उपर वित्तिय भार बढ़ जाएगा. विश्वविद्यालय की इस लापरवाही से इन शिक्षकों को वित्तिय हानि के साथ ही उनके आगे के करिअर पर भी असर पड़ रहा है. राजस्थान विश्वविद्यालय के 272 शिक्षकों का प्रमोशन होना है. प्रमोशन पाने वाले शिक्षकों में कुछ तो एसोसिएट प्रोफेसर हैं और कुछ असिस्टेंट प्रोफेसर. एसोसिएट प्रोफेसरों का प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों का एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन होना है. करीब एक साल पहले उच्च शिक्षा विभाग और राजभवन ने विश्वविद्यालय को 272 शिक्षकों के प्रमोशन की स्वीकृति दे दी थी. इस स्वीकृति को एक साल पूरा होने को आया, लेकिन अभी तक राजस्थान विश्वविद्यालय ने प्रमोशन की प्रक्रिया को शुरू तक नहीं किया है.

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प्रदेश में भाजपा सरकार समय 2018 में राजस्थान विश्वविद्यालय ने असिस्टेंट प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसर के 150 पदों पर शिक्षकों की भर्ती की गई थी. इन शिक्षकों का प्रोबेशन पीरिएड पूरा हुए करीब आठ महीने से अधिक का समय गुजर गया, लेकिन विश्वविद्यालय ने इन शिक्षकों का स्थायीकरण भी नहीं किया है. 

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