राजस्थान विवि ने मार्कशीट और सर्टिफिकेट नहीं दिए, स्टूडेंट्स का करियर अधर में

Smart News Team, Last updated: Tue, 22nd Dec 2020, 8:48 PM IST
  • राज्य सरकार के फैसले के बाद राजस्थान विवि ने नवंबर में कौंसिल के बैठक में लिए निर्णय पर अमल नहीं किया है. विश्वविद्यालय की इस लापरवाही से ढाई लाख के करीब स्टूडेंट्स को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने से वंचित रहने का डर सताने लगा है क्योंकि इसके लिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है.
राजस्थान विश्वविद्यालय

जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से ढाई लाख विद्यार्थियों को मार्कशीट और प्रमोशन सर्टिफिकेट ना दिए जाने के कारण उनका करियर अधर में जाता दिख रहा है. गौर हो कि राज्य सरकार के फैसले के साढे चार महीने बाद राजस्थान विश्वविद्यालय ने स्टूडेंट्स को प्रमोट किए जाने का फॉर्मूला तय तो कर लिया लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी अभी तक प्रमोट हुए विद्यार्थियों को उनकी मार्कशीट तक नहीं दी गई है. स्टूडेंट्स को प्रमोशन सर्टिफिकेट भी अभी तक नहीं मिले हैं. 

विश्वविद्यालय की ओर से तय किए गए फॉर्मूले के अनुसार द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को मार्कशीट दी जानी है. इसके अलावा जो विद्यार्थी स्नातक प्रथम वर्ष और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के हैं, उन्हें प्रमोशन सर्टिफिकेट दिए जाने हैं. स्नातक प्रथम वर्ष के प्रमोट किए विद्यार्थियों को मार्कशीट अंतिम वर्ष की मार्कशीट के साथ ही दी जाएगी. राजस्थान विश्वविद्यालय ने नवंबर के अंतिम सप्ताह में कौंसिल की बैठक में इस संबंध में निर्णय किया था लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय छात्रवृतियां प्राप्त करने के लिए अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की गई है. ऐसे में जिन स्टूडेंट्स को अभी तक मार्कशीट और प्रमोशन सर्टिफिकेट ही नहीं मिले हैं, वे छात्रवृति के लिए आवेदन से वंचित रह जाएंगे. इस वजह से राजस्थान विश्वविद्यालय की अनदेखी के कारण करीब ढाई स्टूडेंट्स में बेचैनी बढ़ती जा रही है.

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विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार के फैसले के बाद ऐसा फॉर्मूला तय किया था कि कोई भी स्टूडेंट्स फेल नहीं हो सकता. फार्मूले के मुताबिक स्नातक प्रथम वर्ष के सभी विद्यार्थी द्वितीय वर्ष में प्रमोट किए जाएंगे. किसी भी विषय में मार्क्स नहीं दिए जाएंगे. अगले साल की अंतिम वर्ष की परीक्षा में जो परिणाम आएगा, उसके साथ ही औसत के आधार पर प्रथम वर्ष के अंक दिए जाएंगे. द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट्स को अंक जिन विषयों के पेपर हो चुके हैं, उनकी उत्तरपुस्तिकाओं के आधार पर दिए जाएंगे. शेष बचे विषयों में अंक पिछली कक्षा यानी प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर दिए जाएंगे. औसत में अगर कोई विद्यार्थी फेल भी हो जाएगा तो उसे न्यूनतम 36 फीसदी अंक दिए जाएंगे.

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