ऋषि गालव की तपोस्थली जयपुर के गलता जी मंदिर का कुंड कभी नहीं सूखता है

Smart News Team, Last updated: Tue, 20th Jul 2021, 9:33 PM IST
  • जयपुर का गलताजी मंदिर, जो कि प्रागैतिहासिक हिंदू तीर्थ स्थल माना जाता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित गलताजी में कई मंदिर बने हुए हैं, इसके अलावा यहां पवित्र कुंड भी है जो कभी भी नहीं सूखता है।
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित गलताजी में कई मंदिर बने हुए हैं, इसके अलावा यहां पवित्र कुंड भी है जो कभी भी नहीं सूखता है. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

जयपुर शहर में ऐसे कई तीर्थ स्थल हैं, जिनकी अपनी-अपनी ही मान्यता है, फिर चाहे वह बिरला मंदिर हो या कलकी मंदिर हो. इन्हीं धार्मिक स्थलों में से एक है जयपुर का गलताजी मंदिर, जो कि प्रागैतिहासिक हिंदू तीर्थ स्थल माना जाता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित गलताजी में कई मंदिर बने हुए हैं, इसके अलावा यहां पवित्र कुंड भी है जो कभी भी नहीं सूखता है. चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा हुआ यह मंदिर खूबसूरत घाटों से घिरा हुआ है. यहां हर साल भारी मात्रा में पर्यटक और श्रद्धालू पहुंचते हैं.

मंदिर का इतिहास: इस मंदिर का निर्माण गुलाबी बलुआ पत्थरों से दीवान राव कृपाराम ने करवाई थी जो कि सवाई राजा जय सिंह द्वितीय के दरबारी थे. कहा जाता है कि यह वही स्थल है जहां ऋषि गालव ने सौ सालों तक तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान उनके सामने प्रकट हुए और इस स्थान को पवित्र जल से आशीर्वाद दिया. इसके अलावा मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी है कि इस जगह पर ही तुलसीदास द्वारा पवित्र रामचरित्र मानस के खंड लिखे गए थे.

 

यह वही स्थल है जहां ऋषि गालव ने सौ सालों तक तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान उनके सामने प्रकट हुए. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

मंदिर का निर्माण बड़े ही खूबसूरत तरीके से किया गया है. मंदिर के खंभों और छत पर सुंदर नक्काशी भी की गई है. इस मंदिर में कई छोटे-छोटे दूसरे मंदिर भी हैं, जो भगवान कृष्ण और भगवान राम को समर्पित हैं. लेकिन यहां का मुख्य मंदिर हनुमान जी को समर्पित है. मंदिर के आसपास का वातावरण खूब हरा-भरा है जो मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाता है. यहां आने वाले पर्यटक भगवान की उपासना तो करते ही हैं, साथ ही यहां के वातावरण में उन्हें खूब शांति भी मिलती है. इसका निर्माण कुछ इस प्रकार से किया गया है कि यह मंदिर से ज्यादा महल प्रतीत होता है.

मंदिर का निर्माण बड़े ही खूबसूरत तरीके से किया गया है. मंदिर के खंभों और छत पर सुंदर नक्काशी भी की गई है. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

गलताजी मंदिर को बंदरों का भी मंदिर कहा जाता है, क्योंकि यहां काफी मात्रा में बंदर रहते हैं. यहां का सबसे मुख्य आकर्षण यहां का प्राकृतिक झरना है. ऊंचे पर्वत से बहता हुआ यह झरना मंदिर में आकर गिरता है. झरने का पानी मंदिर में बने सात अन्य कुंड और तालाबों में गिरता है. वहीं इनमें से गलता कुंड सबसे अधिक महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसका पानी कभी नहीं सूखता है. यहां आने वाले लोग इस कुंड में जरूर स्नान करते हैं.

गलता जी मंदिर में दर्शन करने का सबसे उत्तम समय 14 और 15 जनवरी है, क्योंकि इस दौरान यहां मकर संक्रांति का मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं.

गलताजी मंदिर को बंदरों का भी मंदिर कहा जाता है, क्योंकि यहां काफी मात्रा में बंदर रहते हैं. यहां का सबसे मुख्य आकर्षण यहां का प्राकृतिक झरना है. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

कैसे पहुंचें: जयपुर एयरपोर्ट गलता जी मंदिर का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है. गलता जी मंदिर से एयरपोर्ट की दूरी महज 23 किलोमीटर है, ऐसे में लोग निजी वाहन कर आसानी से यहां पहुंच सकते हैं. वहीं जयपुर रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी महज 13.9 किलोमीटर है, ऐसे में पर्यटक 39 मिनट में यहां आसानी से पहुंच सकते हैं.

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