जयपुर में कहीं टूट ना जाए सुरक्षा चक्र, कोवैक्सीन हुई 'नो' वैक्सीन

Smart News Team, Last updated: Wed, 12th May 2021, 8:42 AM IST
  • जयपुर समेत अन्य जिलों में कोवैक्सीन का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है. ऐसे में यदि दूसरी डोज समय पर नहीं पहुंची तो लाखों लोगों को समय पर डोज नहीं मिल पाएगी.
प्रतिकात्मक तस्वीर 

जयपुर. कोवैक्सीन की पहली डोज लगा चुके लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है. जयपुर समेत अन्य जिलों में कोवैक्सीन अब नो-वैक्सीन हो चुकी है. यानी कोवैक्सीन लगभग खत्म होने की कगार पर है. ऐसे में लोग कोवैक्सीन की दूसरी डोज लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं. दरअसल, शुरुआती दौर में कोवैक्सीन जब पहुंची तो लोगों ने पहली डोज लगवा ली. लेकिन, इसके बाद कोवैक्सीन की आपूर्ति कम हो चुकी है और कोविशील्ड की आपूर्ति ज्यादा हो रही है. राज्य सरकार ने भी कोविशील्ड के करीब साढ़े तीन करोड़ डोज खरीदने के लिए ऑर्डर दिया है. ऐसे में अब कोवैक्सीन ना के बराबर है. इसलिए जिन लोगों ने पहले कोवैक्सिन की डोज लगवाई है, उनके लिए दूसरी डोज भी उसी की लगना अनिवार्य है. नियमानुसार को वैक्सीन की दूसरी डोज 28 दिन के बाद लगनी चाहिए. लेकिन पहली और दूसरी डोज में 8 हफ्ते से ज्यादा का अंतराल नहीं होना चाहिए. लेकिन, बहुत से लोगों को वैक्सीन लिए करीब 40 दिन तक हो चुके हैं अभी तक दूसरी डोज नहीं मिल पाई है. ऐसे में लोगों को यह टेंशन है कि कहीं सुरक्षा का यह चक्र कोवैक्सीन नहीं मिलने से टूट ना जाए.

बता दें कि टीकाकरण को बड़ा झटका कोवैक्सीन की किल्लत से लग रहा है. प्रदेश में कोवैक्सीन की दूसरी डोज का स्टॉक ही नहीं है. पहली बार डोज लगाते समय राज्य सरकार ने दूसरी का स्टॉक सुरक्षित रखने का दावा किया था. लेकिन, वह नहीं रखा गया. उस समय वैक्सीन की आपूर्ति होती रही और पूरा स्टॉक काम में ले लिया गया. अब खरीदी जा रही ढाई लाख कोवैक्सीन आने के बाद ही राहत मिलेगी.

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पहली डोज के बाद कोवैक्सीन की दूसरी डोज 28 से 42 में दिन में लगनी चाहिए. डॉ. मनीष जैन बताते हैं कि पहली और दूसरी डोज में 8 सप्ताह से ज्यादा का अंतराल नहीं हो सकता है. इससे ज्यादा का अंतराल होता है तो जिस व्यक्ति को पहली डोज दी गई है उसका एंटी बॉडी टेस्ट किया जाना चाहिए. यदि एंटी बॉडी डवलप हो जाती है तो दूसरी डोज दी जा सकती हैं. दूसरी डोज को बूस्टर डोज माना जाता है. इस डोज को देने के बाद एंटी बॉडी ज्यादा डेवेलप होती है. हालांकि उनका कहना है कि यदि समय पर दूसरी डोज नहीं लगी तो इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है. यह बात जरूर है कि वैक्सीन का असर कम हो सकता है.

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