वन मंत्रालय का नया फैसला, अब वन्यजीव प्रेमी शेर और बाघ को भी ले सकेंगे गोद

Smart News Team, Last updated: 03/10/2020 04:30 PM IST
  • नाहरगढ़ जैविक उद्यान में शुरू हुई सौगात, खानपान-दवा-प्रवास का वहन खर्च कर सकेंगे. वन्यजीवों की जांच पड़ताल करने जे बाद ही मनपसंद जीवो को गोद ले सकेंगे.
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर। वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक नई खुशखबरी है, जहां वन मंत्रालय के निर्देश के बाद वन्यजीव विभाग में शेर और बाघ को गोद लिए जाने की मंजूरी दे दी गयी है. ऐसे में अब शेर और बाघ को गोद लेने वाले जरूरी खानापूर्ति के बाद बाघ और शेर को गोद ले सकेंगे. वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह अच्छी खबर है. अब वे अपनी मनपसंद के वन्यजीवों को गोद ले सकेंगे. गोद लेने से पहले वन्य जीव को अच्छी तरह देख सकेंगे. जांच पड़ताल किए जाने के बाद ही वह उसे गोद ले सकेंगे. अपने मनपसंद जानवर को कोई भी उसके खर्च के अनुसार गोद ले सकता है.

वन विभाग ने यह योजना नाहरगढ़ जैविक उद्यान में लागू कर दी है. गोद लेने वाले लोग वन्यजीवों के रखरखाव, दवा, भोजन आदि का खर्चा वहन करेंगे.

गोद लिए गए वन्य जीव के रखरखाव उसकी सेवा आदि की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी लेकिन सिर्फ उसके रहन-सहन खान-पान का खर्च ही वह उठा सकेंगे. वन्य जीवों को गोद लिए जाने के बाद उसे घर मे पाल नहीं सकेंगे. चिड़ियाघर में ही वन्यजीवों को रखे जाने की व्यवस्था की गई है. वन्यजीव सप्ताह की शुरुआत के पहले दिन एक संस्था को ऐमू का जिम्मा सौंपा गया है. वन विभाग ने लोगों का वन्यजीवों से जुड़ाव कराने के उद्देश्य से यह सौगात शुरू की है.

दो साल पहले भी इसको लेकर रूपरेखा बनाई गई थी, लेकिन जमीन पर कुछ हो नहीं पाया.

अब दोबारा इसे शुरू किया गया है. नाहरगढ़ जैविक उद्यान में शेर, बाघ, बघेरे, हिप्पो समेत वन्यजीवों की 25 प्रजातियां प्रवास कर रही हैं. गोद लेने के इच्छुक व्यक्ति किसी भी वन्यजीव को गोद ले सकता है. छह महीने या एक साल के लिए ले सकता है. वह चाहे तो गोद लिए गए वन्यजीव के खान-पान का खर्च वहन कर सकता है, अगर ऐसा नहीं कर पा रहा तो दवा और रखरखाव का खर्चा उठा सकता है. यह सभी प्रजातियों के वन्यजीवों के लिए लागू होगी.

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वन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी रूपरेखा बना रहे हैं. अगर कोई गोद लेना चाहे तो, वह डीएफओ से संपर्क कर सकता है. खास बात है कि गोद लेने वाला व्यक्ति वन्यजीव के पिंजरे में मनचाहा बदलाव, रंग रोगन भी करा सकते हैं.

हिप्पो-शेर और बाघ सबसे महंगे

इसमें नाहरगढ़ जैविक उद्यान में प्रवास करने वाली 25 प्रजातियों के जानवरों को शामिल किया गया है. सभी के लिए वार्षिक से लेकर छह माह अवधि की योजना है.

बात करें दरों की तो दरियाई घोड़े पर रोजाना दो हजार रुपए तक खर्चा आता है. यह सबसे महंगा होगा. इसके बाद शेर और बाघ को शामिल किया गया है.

इनके एक दिन के भोजन का औसतन खर्चा 800 से 1100 रुपए है. तीसरे क्रम में बघेरे को शामिल किया गया है. इस पर रोजाना 400 से 500 रूपए खर्चा आता है.

 

इसके अलावा भालू, लोमड़ी, हिरण समेत अन्य वन्यजीव शामिल किए गए. इन पर खानपान 100 से 300 रूपए रोजाना खर्च होता है. इनके आधार पर गोद दिए जाएंगे.

 

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