'आत्मा' के डर से रुका था नाहरगढ़ किले का निर्माण, आज जयपुर का है मजबूत पहरेदार

Smart News Team, Last updated: Sun, 4th Jul 2021, 12:09 PM IST
  • महाराज सवाई जय सिंह ने जब इस किले का निर्माण करवाया तो उस समय इसका नाम 'सुदर्शन गढ़' था. हालांकि, बाद में कुछ परिस्थितयों के कारण किले का नाम बदलकर 'नाहरगढ़' यानी 'बाघों का निवास' रख दिया गया.
जयपुर का मशहूर नाहरगढ़ किला अपनी अद्भुत बनावट, रक्षा और ऐतिहासिक साक्ष्यों को लेकर विशेष महत्व रखता है. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

रजवाडो की भूमि राजस्थान अपने किलो और मनमोहक दृश्यों को लेकर दुनिभर में प्रसिद्ध है. जयपुर का मशहूर नाहरगढ़ किला अपनी अद्भुत बनावट, रक्षा और ऐतिहासिक साक्ष्यों को लेकर विशेष महत्व रखता है. अरावली की पहाड़ियों के किनारे बने किले को जयपुर के राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने साल 1734 में बनवाया था. नाहरगढ़ किले में भारतीय और यूरोपीय वास्तुकला का सुंदर सम्मेलन देखने को मिलता है. बता दें, यह महाराज द्वारा बनवाए गए तीन किलों में सबसे पहला था.

नाहरगढ़ किले में रानियों के लिए 12 खास कमरे बनवाए गए थे और राजा के लिए भी एक शानदार कमरे का निर्माण किया गया था. महाराजा जय सिंह इस किले का इस्तेमाल गर्मियों के मौसम में अपने महल के तौर पर किया करते थे. यह किला भारत में सबसे ऊंचाई पर बनाए गए किलो में से एक है. इसकी ऊंचाई लगभग 1,722 मीटर है. किले की दीवारें पहाड़ी पर फैली हुई हैं, जो इसे जयगढ़ से जोड़ती हैं. बता दें, जयगढ़ आमरे की पुरानी राजधानी थी.

महाराज सवाई जय सिंह ने जब इस किले का निर्माण करवाया तो उस समय इसका नाम 'सुदर्शन गढ़' था. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

'सुदर्शन गढ़' हुआ करता था पहले नाहरगढ़ किले का नाम: महाराज सवाई जय सिंह ने जब इस किले का निर्माण करवाया तो उस समय इसका नाम 'सुदर्शन गढ़' था. हालांकि, बाद में कुछ परिस्थितयों के कारण किले का नाम बदलकर 'नाहरगढ़' यानी 'बाघों का निवास' रख दिया गया. किले में एक माधवेंद्र भवन भी मौजूद है, जहां राजा और उनके परिवारजन गर्मियों के दिनों में रहते थे.

आत्मा के डर से रुक गया था 'नाहरगढ़ किले' का निर्माण कार्य: नाहरगढ़ किले को लेकर एक किंवदंती है कि किले में प्रेतात्मा भटकती थी. इसके निर्माण के समय लोगों ने कुछ ऐसी गतिविधियां देखी, जिसके कारण मजदूर भाग जाते थे. साथ ही एक दिन पहले जो काम किया जाता था वह सब अगले दिन बिगड़ा हुआ मिलता था.

 

मंदिर के निर्माण के बाद ही किले का काम पूरा हो पाया था. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

आत्मा की शांति के लिए बाद में पंडितों और तांत्रिकों की सलाह पर किले में 'नाहर सिंह भोमिया जी' के मंदिर का निर्माण करवाया गया. इसी के बाद किले का नाम बदलकर 'नाहरगढ़' रखा गया. मंदिर के निर्माण के बाद ही किले का काम पूरा हो पाया था.

आत्मा की शांति के लिए बाद में पंडितों और तांत्रिकों की सलाह पर किले में 'नाहर सिंह भोमिया जी' के मंदिर का निर्माण करवाया गया. (Credit: Jaipur Tourism Official Site)

दिल्ली से नाहरगढ़ किला: नाहरगढ़ किला ब्रह्मपुरी क्षेत्र के कृष्णा नगर इलाके में स्थित है. दिल्ली से जयपुर की दूरी करीब 294 किलोमीटर है. आप बस, ट्रेन या फिर फ्लाइट से जयपुर तक का सफर तय कर सकते हैं. बस के रास्ते दिल्ली से जयपुर पहुंचने में केवल 4 घंटे 53 मिनट का समय लगता है. वहीं अगर आप ट्रेन से सफर करना चाहते हैं तो इसमें केवल 5 घंटे 15 मिनट का समय लगेगा. फ्लाइट से केवल डेढ़ घंटे में आप दिल्ली से जयपुर पहुंच सकते हैं.

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