Navratri 2021: नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा करने से होती है मनोकामनाएं पूर्ण, जानें आरती और मंत्र

Anuradha Raj, Last updated: Fri, 1st Oct 2021, 5:58 PM IST
  • नवरात्रि के व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ही ज्यादा महत्व होता है. नवरात्रि मां दुर्गा को समर्पित होता है. ऐसे में अगर आप विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है.
Navratri 2021

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है. पुराणों में वर्णन किया गया है कि कमल पर स्कंदमाता विराजमान रहती हैं. ऐसे में उन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है. तो वहीं छह मुख वाले स्कंद कुमार मां स्कंदमाता के गोद में विराजमान रहते हैं. अत्यंत लाभकारी होता है स्कंतमाता की पूजा करना. जो लोग विधि-विधान से स्कंदमाता की पूजा अर्चना करते हैं उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होता है, साथ ही शत्रुओं का भी विनाश हो जाता है. इसके अलावा स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है.

स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंदमाता।

पांचवां नाम तुम्हारा आता।

सबके मन की जानन हारी।

जग जननी सब की महतारी।

तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं।

हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।

कई नामों से तुझे पुकारा।

मुझे एक है तेरा सहारा।

कहीं पहाड़ों पर है डेरा।

कई शहरो में तेरा बसेरा।

हर मंदिर में तेरे नजारे।

गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।

शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।

इंद्र आदि देवता मिल सारे।

करे पुकार तुम्हारे द्वारे।

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।

तुम ही खंडा हाथ उठाए।

दास को सदा बचाने आई।

चमन की आस पुराने आई।

स्कंदमाता बीज मंत्र

हीं क्लीं स्वमिन्यै नमः।

 

स्कंदमाता की स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

मां स्कंदमाता का भोग

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने के बाद उन्हें केले का भोग देना बिलकुल भी ना भूलें.

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