35 साल पुराने रेप केस में फिर सुनवाई शुरू, अब ना आरोपी और ना पीड़िता जिंदा

Smart News Team, Last updated: 14/12/2020 08:37 PM IST
  • कानपुर के 35 साल पुराना रेप केस की सुनवाई दोबारा शुरू होने जा रही है, लेकिन इस बलात्कार मुकदमे से जुड़े हुए आरोपी और पीड़िता की पहले ही मौत हो चुकी है.
35 साल पुराना रेप केस की शुरू होगी सुनवाई

कानपुर. कानपुर में हुए 35 साल पहले भला फुसलाकर भगा कर ले जाने और रेप केस का मुकदमे पर सुनवाई होने जा रही है. इस केस में सबसे बड़ी बात तो ये है कि इस मामले से सम्बन्धित पीड़िता और मुख्य आरोपी दोनों की मौत हो चुकी है. वहीं इस मुकदमे के चार्टशीट पर स्टे लगने के बाद से बाकि के आरोपी खुली हवा में घूम रहे थे. इलाहबाद हाईकोर्ट की तरफ से स्टे ख़ारिज होने एक बाद से इस केस पर अदालत में 14 दिसम्बर को सुनवाई होगी.

यह है पूरा मामला

कानपुर के परमपुरवा जूही के निवासी कपडा दुकानदार ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया था कि उनके पडोसी नरेश ने उनकी 14 साल की बेटी को 18 अक्टूबर 1985 की रत को बहला फुसलाकर इलाहबाद भगा कर ले गया. आरोपी युवक ने किशोरी को अपनी मौसी के पास रुकने को लेकर गया था, लेकिन उसे अपनी मौसी के यहां पर शरण नहीं मिला. जिसके बाद वह वापस इलाहबाद रेलवे स्टेशन आ गया.

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जहाँ पर उसे एक पप्पू नाम का आदमी मिला. जिसने दोनों को शरण देने के नाम पर अपने आवास पर लेकर गया. जहां पर पप्पू ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर किशोरी के साथ दुष्कर्म किया. उसके बाद दोनों को जान से मरने कि धमकी देकर शांत रहने के लिए कहा था. जिसके बाद दूसरे दिन पप्पू अपने साथियों के साथ मिलकर किशोरी और युवक को गाड़ी में बैठाकर ले जा रहे थे, तो रास्ते में पुलिस को देखकर किशोरी ने चिल्लाकर उन बदमाशों से अपना बचाव किया था.

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जिसके बाद धूमनगंज पुलिस ने मौके से नरेश और पप्पू को गिरफ्तार किया था, लेकिन श्रीचंद भागने में कामयाब हो गया था. वहीं किशोरी के पिता ने कानपुर के जूही थाने में नरेश, उसके भाई रमेश, सुरेश, और बहन जमुना के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था. जब किशोरी इलाहबाद से बरामद हुई तो 29 अक्टूबर को उसके बयान के आधार पर पप्पू और श्रीचंद के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था.

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जब 22 जुलाई 1986 को पप्पु जमानत पर छूटकर बाहर निकला तो उसने हाईकोर्ट से चार्जशीट पर स्टे ले आया. जिसके बाद से इस मुकदमे पर रोक गई थी. 10 फरवरी 2019 को जब हाईकोर्ट ने बलात्कार से जुड़े सभी मामलो के स्टे को रद्द कर दिए तो यह मुकदमा भी दोबारा शुरू हो पाया है.

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