निजीकरण के खिलाफ बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, रोष प्रदर्शन

Smart News Team, Last updated: Mon, 15th Mar 2021, 3:38 PM IST
  • केंद्र सरकार की ओर से बैंकों का प्राइवेटाइजेशन किए जाने के विरोध में यूनाइडेट फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के तहत नौ यूनियनों ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल की घोषणा की है. हड़ताल की वजह से बैंकों का करीब 30 करोड़ का कामकाज प्रभावित हुआ है.
कानपुर में रोष प्रदर्शन करते हुए बैंक कर्मचारी.

कानपुर. बैंक कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल के साथ प्रदर्शन किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में बैंक के कर्मचारियों की ओर से नारेबाजी की गई. आपको बता दें कि बजट 2021 के भाषण के दौरान कहा था कि केंद्र सरकार इस साल 2 सरकारी बैंकों और एक इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण करेगी. 

बैंक कर्मचारी नेता अरविंद कुमार और अनिल मिश्रा ने प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने साल 2019 में भारतीय जीवन बीमा निगम में आईडीबीआई बैंक की बहुलांश हिस्‍सेदारी बेची थी. पिछले 4 साल में 14 सार्वजनिक बैंकों का विलय भी किया गया है. इसके बाद फिलहाल देश में 12 सरकारी बैंक हैं. वहीं, दो बैंकों का वित्त वर्ष 2021-22 में निजीकरण होने के बाद इनकी संख्या 10 रह जाएगी. देश के दो बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ यूनाइडेट फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के तहत नौ यूनियनों ने इकट्ठे होकर यानि 15 मार्च और कल यानि 16 मार्च 2021 को हड़ताल का ऐलान किया है.  

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ऑल इंडिया बैंक एम्पलाॉइज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने दावा किया था कि करीब 10 लाख बैंक के कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होंगे. हड़ताल के कारण पंजाब नेशनल बैंक ,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ,केनरा बैंक समेत कई सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल की वजह से 30 करोड़ रुपए का कामकाज पर असर पड़ने की जानकारी दी है.

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