बिकरू कांड: गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी रिचा और भाई सहित नौ लोगों पर FIR दर्ज

Smart News Team, Last updated: 20/11/2020 02:28 PM IST
एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद विकास दुबे की पत्नी और उसके भाई सहित नौ लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. दरअसल इन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सिम खरीदी थी. जिसका खुलासा एसआईटी की जांच में हुआ था. इसके बाद एसआईटी ने पुलिस को इन लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे.
विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे और उसके भाई सहित नौ लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.

कानपुर. बिकरू कांड में एसआईटी की जांच के बाद विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे और उसके भाई समेत 9 लोगों के खिलाफ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है. गौरतलब है कि एसआईटी ने अपनी जांच के बाद पुलिस को उन पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे.

ज्ञात हो कि पहले बिकरू कांड की जांच एसआईटी कर रही थी. जिन्होंने अपनी जांच में कुछ पुलिस अफसरों सहित विकास दुबे की पत्नी सहित कुछ लोगों को भी दोषी पाया. रिचा दुबे सहित उसके रिश्तेदारों और परिचितों ने फर्जी दस्तावेजों से सिम लिए थे. रिपोर्ट के आधार पर अब जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा रिचा दुबे और उसके रिश्तेदारों पर कार्रवाई की गई है.

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एसआईटी की जांच में यह भी पाया गया कि रिचा दुबे, मोनू, अरविंद त्रिवेदी, राजू बाजपेई, विष्णु पाल, दीपक, शिव तिवारी, शांति देवी, खुशी और रेखा ने भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम ली थी. इसके अलावा जय बाजपेई ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था. पुलिस ने जब इन नंबरों की जानकारी निकाली सब फर्जी दस्तावेजों की बात सामने आई. इन सभी के खिलाफ एसआईटी टीम के अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी के निर्देश पर पुलिस को कार्रवाई करने के लिए कहा गया.

आपको बता दें कि गत 2 जुलाई की रात बिकरू गांव में जब पुलिस गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची तो बदमाशों ने पुलिस पर हमला कर दिया. जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी मारे गए. इसके बाद विकास दुबे भी यूपी एसटीएफ के द्वारा अपने पांच साथियों सहित मुठभेड़ में मारा गया. इसके बाद इसकी जांच के लिए तीन सदस्य वाली एसआईटी का गठन किया गया.

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एसआईटी का गठन अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में किया गया है. इसमें अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा और पुलिस उप महानिरीक्षक जे रवींद्र गौड़ को सदस्य बनाया गया है. जिन्होंने जांच कर 4 नवंबर को सरकार को लगभग साढ़े तीन हज़ार पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी.

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