बिकरु कांड -एसआईटी ने पुलिस व प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव करने की सिफारिश

Smart News Team, Last updated: 03/12/2020 09:13 PM IST
  • कानपुर में 2 व 3 जुलाई को थाना चौबेपुर के अंतर्गत हुए बिकरु कांड कुल लगभग 5 महीने पूरे हो चुके हैं. एसआईटी ने अपनी जांच भी पूरी कर ली है.  सूत्रों की माने तो एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पुलिस व प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए बदलाव करने की सिफ़ारिश व सुझाव दिए हैं.
 एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पुलिस व प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए बदलाव करने की सिफ़ारिश

कानपुर: बिकरु कांड जांच कर रहे एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पुलिस और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं.सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने बुनियादी पुलिसिंग और बीट पुलिसिंग में भी सुधार लाने का सुझाव दिया है. उन्होंने कहा है कि पुलिस कर्मियों का निशाना अचूक हो सके, इसके संसाधन भी जुटाने होंगे. उनके लिए फायरिंग रेंज और वहां लगातार अभ्यास बहुत जरूरी है. इसी के साथ एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने , अपराधियों का ब्योरा लगातार अपडेट किए जाने, अभियोजन स्वीकृति के मामले में निर्णय की प्रक्रिया तेज करने का सुझाव दिया गया है.

एसआईटी ने पुलिस के द्वारा दबिश देने के दौरान की जाने वाली तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. और एसआईटी ने सुझाव दिया है कि विकास दुबे जैसे कुख्यात अपराधी के यहां पर दबिश देने के दौरान मानकों को ताक पर रख दिया गया और नियमों का पालन नहीं किया गया जिसका नतीजा बेहद ख़तरनाक रूप ले कर सामने आया था. किस लिए पुलिस को अपराधी के अड्डे पर दबिश देने से पहले पूरी तैयारी के साथ व प्रोफेशनल तरीकों से दबिश देना चाहिए जिसके लिए पुलिस को बेहतरीन ट्रेनिंग की जरूरत है इसके लिए ट्रेंड दबिश टीम भी अलग से बनाई जानी चाहिए.

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न्याय क्षेत्राधिकार में भी होना चाहिए बदलाव -

सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी बताया है कि बिकरू कांड में एक बात भी निकल कर सामने आई की घटनाक्रम कानपुर नगर के थाने के अंतर्गत हुआ और न्यायिक क्षेत्राधिकार कानपुर देहात में आ रहा था और एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि इससे भी अभियुक्त विकास दुबे को तकनीकी लाभ मिलता रहा.इस कारण एसआईटी ने सिफारिश की है कि यदि प्रदेश के किसी अन्य जिले में भी यदि ऐसी स्थिति हो तो उसमें बदलाव किया जाएगा।जिस जिले का थाना हो,वह उसी जिले की अदालत के अधीन रहना चाहिए.

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