बिकरू कांड: विकास दुबे के साथी उमाशंकर का सरेंडर, पुलिस को चकमा दे पहुंचा कोर्ट

Smart News Team, Last updated: 15/10/2020 08:48 AM IST
  • कानपुर के कुख्यात बदमाश और बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दूबे के एक और सहयोगी ने कल आत्म समर्पण कर दिया. इसका नाम उमाशंकर यादव है ये बीते दिनों से पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा और कल डकैती कोर्ट में सरेंडर कर दिया. ये विकास को दूध के पीपों में अवैध हथियारों की सप्लाई करता था.
विकास दुबे के साथी उमाशंकर का सरेंडर, पुलिस को चकमा देकर कोर्ट पहुंचा

कानपुर: बिकरू कांड में मुख्य आरोपी विकास दूबे के सहयोगी, फरार चल रहे उमाशंकर यादव ने बुधवार को एंटी डकैती कोर्ट में सरेंडर कर दिया. जिसके बाद यहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. बताया जा रहा है कि पुलिस की टीमें उमाशंकर और विपुल दुबे की तलाश में लगी हुई थीं मगर वह चकमा देने में कामयाब रहा. अब पुलिस के लिए विपुल को गिरफ्तार करना बड़ी चुनौती बन गया है. बता दें कि इसे पकड़ने के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट की तैयारी होगी.

जानकारी के मुताबिक बुधवार को माती कोर्ट खुलने से पहले ही उमाशंकर पहुंच गया और परिसर के बाहर एक कमरे में छुपकर कोर्ट खुलने का इंतजार करता रहा. पुलिस को जब तक भनक लग पाती उससे पहले बार के पूर्व पदाधिकारी एडवोकेट अवधेश शुक्ला ने उसे सरेंडर करा दिया. पुलिस की टीम कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद थी मगर जानकारी नहीं मिल सकी. सुज्जानिवादा का रहने वाला उमाशंकर यादव, कुख्यात आरोपी विकास दुबे का करीबी था. जिलेदार ने उसे विकास दुबे को सौंपा था.

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कहा जाता है कि पहले जिलेदार, विकास का खास था मगर उसके प्रधानी और व्यापार के कारण वह विकास को पूरा समय नहीं दे पा रहा था. उस कारण उमाशंकर को उसके साथ लगवा दिया था. उमाशंकर पेशे से दूधिया था. सुज्जानिवादा से लेकर भीटी, बिकरू और दिलीपपुर तक दूध पहुंचाता था. बताया जा रहा है कि उमाशंकर ने अपनी तरह कई दूधिये तैयार किए थे. यह लोग दूध के पीपों में अवैध असलहा और कारतूस लेकर विकास दुबे को सप्लाई करते थे.

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यही नहीं उमाशंकर के नाम पर बंदूक का लाइसेंस हैं. बिकरू में हुई घटना में इसकी लाइसेंसी बंदूक का भी इस्तेमाल हुआ था. वह ज्यादातर वक्त विकास की सेवा में रहता था. इसके साथ ही जिन गांवों में उमाशंकर दूध देने जाता था वह वहां पर विकास दुबे के लिए जासूसी भी करता था. विकास को इस बारे में जानकारी चाहिए होती थी कि ग्रामीणों के बीच उसकी दबंगई कम हो रही है या बढ़ रही. इसे लेकर वह अपने कई गुर्गों से ग्रामीण इलाकों में अपनी हवा को लेकर जानकारी लेता था.

 

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