KDA के अफसर भूमाफिया से सीख रहे ABCD, अवैध निर्माण कर विकास प्राधिकरण को फंसाया

Smart News Team, Last updated: Tue, 12th Jan 2021, 9:40 AM IST
  • कानपुर विकास प्राधिकरण के अफसरों को भूमाफिया ने एबीसीडी के चंगुल में फंसा दिया है. कानपुर के जूही में एक या दो नहीं बल्कि 200 से ज्यादा इमारतें ऐसी हैं जिनका रिकॉर्ड केडीए के पास नहीं है.
कानपुर विकास प्राधिकरण के अफसर एबीसीडी के चक्कर में फंसे.

कानपुर. कानपुर विकास प्राधिकरण के अफसरों को नए सिरे से अंग्रेजी की वर्णमाला सिखाने के लिए भूमाफिया आगे आ गए हैं. जमीनों पर कब्जा करने और उनपर अवैध इमारतों बनाकर भूमाफियाओं ने केडीए अफसरों को एबीसीडी के चक्कर में फंसा दिया है.

केडीए अफसरों की इस पढ़ाई की वजह जूही में फर्जी आवंटन के जरिए बन गई इमारतों के नंबर हैं. यहां एक या दो नहीं बल्कि लगभग 200 इमारतें हैं जिनके भूखंडों के आवंटन के रिकॉर्ड कानपुर विकास प्राधिकरण के पास नहीं हैं. यहां किसी इमारत का नंबर 200 ए है तो किसी का 200 बी. कई जगह इमारतों के नंबर अंग्रेजी वर्णमाल के अक्षर एम, एन, ओ, पी से लेकर जेड तक हैं. वहीं विकास प्राधिकरण के डॉक्यूमेंट्स में भवन संख्या 200 तक है और उनके पास एबीसीडी की कोई फाइल ही नहीं है. 

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बता दें कि साल 2017 में केडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष विजयेंद्र पाण्डियन ने प्राइवेट एजेंसी से शहर में अवैध निर्माण का पता लगाने के लिए सर्वे कराया था. एजेंसी ने छह महीने बाद रिपोर्ट सौंपी जिसमें पाया गया कि जूही इलाके में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण किए गए हैं. रिपोर्ट में मकानों के नंबर भी थे.  

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अवैध निर्माण करने वालों के पास आवंटन के कागज हैं लेकिन केडीए के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके बाद यह निर्देश दिया गया कि सभी जोन के प्रभारी मकान नंबरों का सत्यापन करें. वहीं जब अब सत्यापन हो रहा है तो 200 से भी ज्यादा भवनों के फर्जी नंबरों का खुलासा हुआ है. 

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भूमाफिया ने केडीए के आवंटन की शैली अपनाकर अवैध निर्माण खड़े किए हैं. जो भूखंड कानपुर विकास प्राधिकरण ने आवंटित किए थे उन्हीं के बगल में प्लॉट काटे गए और उनके नंबर आवंटित भूखंड संख्या के आगे एबीसीडी आदि अंकित कर दिए. यही मामला अब केडीए के लिए मुसीबत बन गई है. 

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