हाय सिस्टम! तीन साल से रुका है वेतन, बार-बार पूछ रहे शिक्षक हैं या प्रधानाचार्य

Smart News Team, Last updated: 04/10/2020 12:38 AM IST
  • कानपुर में एक विद्यालय की मैनजमेंट कमेटी और प्रधानाचार्य के बीच विवाद के मामले में शनिवार को शिक्षा निदेशक ने वेतन भुगतान का आदेश दिया.
प्रतीकात्मक तस्वीर

कानपुर : शहर के एक स्कूल में कार्यवाहक प्रधानाचार्य और प्रबंधतंत्र के बीच चल रहे विवाद के बाद शनिवार को शिक्षा निदेशक ने वेतन के भुगतान का आदेश दिया.  शिक्षा विभाग को यह बात तय करने में तीन वर्ष का समय लग गया कि सुबोध कुमार कटियार कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं या सहायक अध्यापक हैं. 

जानकारी के मुताबकि फेयर कमेटी इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुबोध कुमार कटियार को लेकर विद्यालय में 2007 से विवाद चल रहा था. साल 2012 में मनैजमेंट कमेटी के दावों के अनुसार यह अल्पसंख्यक विद्यालय घोषित हो गया. सुबोध कुमार कटियार को कार्यवाहक प्रधानाचार्य पद से हटाकर एक अन्य की नियुक्ति कर दी गई. जिसके बाद ये विवाद कोर्ट पहुंचा तो माइनॉरिटी के दर्जे को यथा स्थिति बनाए रखते हुए अंतिम फैसले तक अल्पसंख्यक विद्यालय तो रखने के आदेश हुए लेकिन यह भी कह दिया गया कि इस आधार पर कोई अन्य कार्य नहीं होगा. स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद कार्यवाहक प्रधानाचार्य को वेतन व एरियर भुगतान हो जाना चाहिए था लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय उन्हें वेतन नहीं दिला सका. शनिवार को शिक्षा निदेशक ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया है कि वे कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं और उन्हें वेतन भुगतान किया जाए.

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विवाद के चलते प्रबंधन ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य को निलंबित करते हुए डिमोशन कर अध्यापक बना दिया. जिसके बाद कोर्ट में फिर दो बार यह विवाद पहुंचा और अदालत ने डीआईओएस को इसे हल करने के निर्देश दिए. निलंबन बहाल हो गया तो डिमोशन को लेकर लेकिन फिर टर्मिनेशन को लेकर विवाद हुआ. जिस कारण मामला दुबारा कोर्ट पहुंचा. प्रबंधन ने कोर्ट में चल रहे वाद के बीच दो नियुक्तियां कर लीं. विद्यालय के माइनॉरिटी स्टेटस को लेकर मार्च 2017 में फिर विवाद शासन तक पहुंचा. माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री हरिश्चंद्र दीक्षित ने बताया कि 25 अगस्त को स्थिति स्पष्ट होने के बाद भी वेतन भुगतान नही किया गया. 

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