JSVM की रिसर्च में दावा, डायबिटीज के 43.30 फीसदी मरीज जीभ से स्वाद पता लगाने में असमर्थ

Haimendra Singh, Last updated: Sun, 6th Mar 2022, 12:54 PM IST
  • कानपुर के जेएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि शुगर के 43 फीसदी मरीजों को जीभ से खाने की चीजों का स्वाद पता लगाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. यह रिसर्च एक तक की गई है.
जेएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर. ( फाइल फोटो )

कानपुर. किसी भी चीज को खाने के बाद उसके स्वाद का पता लगाने में जुबान मददगार साबित होती है. चीभ से हमे पता चलता है कि जो हम खा रहे हैं वो फीकी है, मीठा है, खट्टा या कड़वा है. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि लाइफ स्टाइल सिंड्रोम और बढ़ती उम्र में होने वाली डायबिटीज के बीमारी से 43.30 प्रतिशत मरीजों में यह स्वाद विकार पाया जाता है. मेडिकल कॉलेज ने इस स्टडी को करने के लिए एक साल का समय लिया है. 

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्रो. जेएस कुशवाहा ने बताया कि इस अध्ययन ने यह साफ हो गया है कि डायबिटीज का असर केवल किडनी, हार्ट, लिवर व आंखों पर ही पड़ता है. अध्ययन में पाया गया कि स्वाद को पहचानने में आधे शुगर के मरीज धोका खा जाते है. वह लोग ज्यादा मीठे को बहुत कम मीठा और कम मीठे को बहुत मीठा समझने लगते है. वही, खट्टा, नमकीन और कड़वा स्वाद पहचानने में भी जुबान गफलत में पड़ जाती है. मेडिकल कॉलेज द्वारा किए गए इस अध्ययन में 60 मरीजों से इस रिपोर्ट पर सहमति मिल गई है.

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अध्ययन में सभी मरीजों पर एचबीए1 सी, फास्टिंग और पीपी सैम्पल टेस्ट किया गया. इन डायबिटीज मरीजो को कड़वे, नमकीन, मीठे और खट्टे सॉल्यूशन दिए गए और इन मरीजों को नहीं बताया गया कि इनका स्वाद कैसा है. एक तक की रिसर्च में पाया गया कि 43.30 फीसदी डायबिटीज मरीजों को खट्टे-मीठे, कड़वे में अंतर और खट्टे समझने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. हर बढ़ने पर एचबीए1 सी में 0.04% बढोत्तरी की गई.

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