गंगा को समृद्ध और निर्मल बनाएंगे नार्वे, हंगरी, ब्रिटेन व डेनमार्क, जल्द शुरू होगा काम

Sumit Rajak, Last updated: Mon, 24th Jan 2022, 9:19 AM IST
  • नार्वे, हंगरी, डेनमार्क और ब्रिटेन अब गंगा को समृद्ध, स्वच्छ व कीचड़ मुक्त बनाएंगे. इन देशों के वैज्ञानिकों व तकनीक की सहायता से देश के वैज्ञानिक गंगा को समर्थ बनाएंगे. जिससे इसकी दशा-दिशा में सुधार हो और साथ ही आर्थिक रूप से भी मददगार साबित हो सके. भारत सरकार के निर्देश पर इन चारों देशों के साथ आईआईटी कानपुर स्थित सी-गंगा ने समझौता किया है.
फाइल फोटो

कानपुर. नार्वे, हंगरी, डेनमार्क और ब्रिटेन अब गंगा को समृद्ध, स्वच्छ व कीचड़ मुक्त बनाएंगे. इन देशों के वैज्ञानिकों व तकनीक की सहायता  से देश के वैज्ञानिक गंगा को समर्थ बनाएंगे, जिससे इसकी दशा-दिशा में सुधार हो और साथ ही आर्थिक रूप से भी मददगार साबित हो सके. भारत सरकार के निर्देश पर इन चारों देशों के साथ आईआईटी कानपुर स्थित सी-गंगा ने समझौता किया है. भारत सरकार की निर्देश के बाद सी-गंगा के फाउंडर प्रो. विनोद तारे की अगुवाई में ये सभी कार्य जल्द से जल्द  शुरू हो जाएंगे.

गंगा को स्वच्छ व अविरल बनाने के लिए वर्ष 2016 में सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज (सी-गंगा) की स्थापना आईआईटी कानपुर में हुई थी. सी-गंगा लगातार तकनीक की मदद से गंगा को स्वच्छ व सुंदर बनाने का प्रयास कर रहा है. प्रो. तारे ने बताया कि देश के वैज्ञानिकों ने भारत सरकार के मंत्री व अधिकारियों के साथ मिलकर गंगा को स्वच्छ, निर्मल, अविरल बनाने के साथ सक्षम बनाने का फैसला लिया है. वही बता दें कि पिछले पांच साल से सी-गंगा विभिन्न योजना तैयार कर रहा है.

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ये कार्य करेंगे

नार्वे : सी-गंगा ने नार्वेजियन इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोइकोनॉमी रिसर्च के साथ समझौता किया है. वहां के वैज्ञानिक गंगा में कीचड़ प्रबंधन ढांचे का विकास करेंगे.

हंगरी: सी-गंगा ने यूपीएस हंगरी के साथ समझौता किया है. इसके तहत गंगा नदी बेसिन बहाली और संरक्षण कार्यक्रम पर कार्य होगा. इसमें हंगरी के उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा.

डेनमार्क: इनोवेशन सेंटर, डेनमार्क के साथ सी-गंगा का समझौता हुआ है. यह ज्ञान का आदान-प्रदान करने के साथ गंगा से जुड़े इनोवेशन पर कार्य करेगा.

ब्रिटेन: सी-गंगा का ब्रिटिश वाटर के साथ समझौता हुआ. इसमें पानी और पर्यावरण क्षेत्र में 21वीं सदी के बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा. पानी के कचरे को भी उपयोगयुक्त बनाने पर कार्य होगा.

ये होंगे लाभ

नदियों के संरक्षण की योजना होगी, जिससे नदियों के संसाधनों के दोहन पर लगाम लगेगी. वहीं नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों की परस्पर संबद्धता को देखकर गंगा या अन्य नदी संरक्षण को भी लाभ मिलेगा. साथ ही ग्रीन बफर जोन या बाढ़ क्षेत्र की जानकारी मिलने से आपदा से बचा जा सकेगा. वही इजरायल की जल बचत करने वाली सिंचाई विधियां व ऑस्ट्रेलिया के सफल जल सुधार तकनीक को अपनाने पर जल्द फैसला होगा.

 

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